चहुंदिश के द्युति दीप्त संकल्प ,
उच्च शिखर वक्ष दृढ़ विकल्प ..!!
सीमाओं के अजेय रक्षक प्रहरी ,
मातृ भूमि के अडिग संतरी..!!
लहु क्रीड़ाएं दिवसों - वर्षों से अजेय,
बारम्बार चुनौती स्वीकार्य रिपुंजय..!!
हिम ,शैल से कन्याकुमारी सागर तट,
भारत के रक्षक गूंजे गान जन जागृत..!!
मोहताज नहीं मुखर अंत परिचय ,
जन -जन उद्देश्य उद्घोषित जय -जय ..!!
वर्दी- आयुध धारण गर्वित ललाट,
बलशाली, शक्ति,वीरयोद्धा हे नायक..!!
झंझावात के महासमर का वक्त ,
अम्बर से धरा उत्पात हो रहा रक्त..!!
देश की आन का गौरवित भारत रक्षक ,
शान रहा हरित, केसरिया ,श्वेत ध्वज ..!!
युग प्रहरी मातृभूमि के जांबाज,
मातृ भूमि झुकती करती नमन् ..!!
रचित शूरवीर गाथाओं के अधिनायक ,
मृण -स्मित रक्षक, स्वर्णिम ऐतिहासिक.!!
सुनंदा ☺️

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