प्यार  इक अहसास है,ये कोई तीन हर्फ नहीं,
है ये इक जज़्बात जो लफ्जों में हो  बयां नहीं।

दिल में अगर प्यार है, निगाहों  से बयां कर दो,
वो ग़र शर्मा जाते हैं, तुम ही कुछ पहल कर दो।

प्यार मिल जाने पर इस,  दिल को धड़कने दो,
दिल अगर बेताब हो, इस बेताबी। को बढ़ने दो।

प्यार सौन्दर्य है उसे,किसी आईने की ज़रूरत नहीं,
दिल किसी श्यामा  पे फ़िदा है, श्वेता भायेगी नही।

प्यार की तारीफ़ क्या,वो इक चेहरे पर फ़िदा होता है,
महब़ूब की नश़ीली आंखों के, नश़े पे  कुर्बां  होता है।

अहसास ए प्यार को हमेशा, दिल मे जवां रखो।
वे अगर कुम्हलाने लगे तो, उन्हें स्नेह से तर रखो।

इक़रारे इश्क होने पर, उसे शिद्दत से निभाना सीखो,
प्यार में ज़ी तो सभी लेते हैं,हद से गुज़र जाना सीखो।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'