अब मुझे गुजरा जमाना याद आता है
मुझे देख कर मुस्कुराना याद आता है
वो चुप चुप के रोना वह पल पल में हंसना
वो नींदों में उठ ना वह सपनों में खोना
वो खामोश रहकर भी सब कुछ कहना
वो दूर दूर रहकर भी पास पास रहना
वो खुद से भी बढ़कर यकीन तुझ पर करना
वो रब से भी बढ़कर तुझे प्यार करना
वो दीदार का तेरे इंतजार करना वो सिर्फ तेरी बातों का एतबार करना
तू मेरा ही है और मेरा रहेगा
यह एहसास ही साथ मेरे रहेगा भले दूरियां थे पर हम पास ही थे वो नजदीक रहने का के एहसास ही थे
मण्डला (मप्र)

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