‌           

खिल गया चेहरा, 
उदास बच्चों का, 
देख कर खिलौने, 
आये थे जो, 
खुशी में उनकी, 
शामिल होने, 

वो खिलौने, 
बैठे जो उदास, 
देख कर झुग्गी में, 
मुर्झाये से उन,
चेहरों को, 
हो गये उदास, 

पहुँचे जैसे ही, 
वो बच्चों के पास, 
चमक उठा, 
उनका चेहरा,
होठों पर, 
आयी मुस्कान, 

मुरझाये से चेहरे, 
दमक रहे थे, 
टेडी बंदर भालू, 
गुड़िया रानी,
सब खेल खिलौने, 
संग खेल रहे थे, 

गुड़िया रानी ने, 
मटकायीं, 
आँखे अपनी, 
कमर मटका कर, 
होले से वो, 
नाच रही, 

बंदर भालू ,
गा गा कर गाना, 
बजा रहे,
ढपली प्यारी, 
फुदक फुदक कर, 
नाच रहा, 
डागी भी हमारा, 

झुग्गी में लौटी, 
खुशियाँ सारी, 
टेडी बंदर खुश,
खुश हो गये बच्चे, 
जो थे मुरझाये, 
खुश हुये खिलौने, 
थे जो उदास, 

खुश हो बंदर, 
पीट रहा था ढोल, 
नाच रही थी, 
वो गुड़िया रानी, 
खुश हो रहे बच्चे, 
बजा बजा कर ताली ।

          काव्य रचना -रजनी कटारे
                जबलपुर (म. प्र.)