बेटियां सदैव अपने पिता की दुलारी होती हैं।मेरी जिंदगी में पिता का स्थान मां से ज्यादा था।मुझे लगता मां भाई को ज्यादा प्यार करती है,लेकिन एक मां बनने के बाद ये अहसास हुआ की माता पिता अपने सभी बच्चों को समान ही प्यार करते हैं,लेकिन हम इस भावना को समझ नहीं पाते।


पापा से जुड़ी बहुत सी यादें हैं ,जो उनके जिक्र के साथ अनायास ही जेहन में उभर आती हैं।

पापा मम्मी के झगड़े का कारण मैं होती थी,मां काम करने कहती, मैं किताबे लिए बैठी रहती,अभी मुझे पढ़ना है ,ऐसा कहती, पापा भी  मेरा ही  पक्ष  लेते।

मां गुस्सा होती ,क्या बेटी के घर भी जाकर काम करोगे ,जो इसको कुछ करने नहीं देते।
पापा हंसते और कहते _और क्या?

एक बार की तो बात है ,मेरे इम्तहान चल रहे थे ,उस समय मैं कक्षा 2 में पढ़ती थी,मां को किसी काम से गांव जाना पड़ा ,जाना जरूरी था ,और पापा ,मैं ही घर में थे। ,भाई भी मां के साथ गया था।

पापा ने ऑफिस से छुट्टी ले ली,वो खाना बनाते ,मुझे तैयार करके स्कूल भेजते ,मुझे मां की कमी खलने नही दी।

इम्तहान का अंतिम दिन था ,स्कूल का फरमान था , कि सभी बच्चे कुछ न कुछ घर से बनवा कर लाएं,उसपर भी नंबर मिलेंगे।

मैंने पापा को बताया  ,पापा परेशान ,इतनी मुश्किल से तो खाना बन रहा था ,अब कुछ स्पेशल बनाना होगा।

कुछ समझ में नहीं आ रहा था।घर में सोया मेथी साग के अलावा कुछ था भी नहीं।
मुझे तो उस समय खाने ,खेलने और स्कूल जाने के अलावा कुछ भी पता भी न था।

पापा ने सुबह उठकर पूरियां तली,सोया ,मेथी , पालक का मिक्स साग बनाया ,और सेवइयां तैयार की।
वैसे पूरी के साथ साग का कोई कॉम्बिनेशन तो होता नहीं ,मेरा मुंह बना था , कि पता नही कैसे नंबर मिलेंगे।

सभी अपना अपना लाया व्यंजन टीचर के सामने रख रहे थे ,मेरी भी पारी आई।
टीचर ने मेरे पापा का बनाया खाना चखा ,वो वास्तव में बहुत स्वादिष्ट था।स्टाफ रूम में ले जाकर  उन्होंने और भी टीचरों को खाना चखाया ।सबने खूब तारीफ की।

उन्होंने मुझसे पूछा,तुम्हारी मम्मी ने बनाया?
मैने बाल सुलभ जवाब दिया ,_नहीं टीचर मेरे पापा ने ।
मैने घर आकर पापा को बताया।जब रिजल्ट आया तो एक्स्ट्रा एक्टिविटी के कालम में इसके लिए नंबर दिए गए थे ,जो कि मेरे सबसे ज्यादा थे।

मेरे पापा मेरे हर मुसीबत में साथ थे।
मैं रोती तो उनके आंसू पहले ही निकल जाते।
आज वो नहीं हैं हमारे साथ पिछले साल एक सड़क हादसे में वे हमारे बीच नहीं रहे।

लेकिन कभी महसूस नहीं हुआ कि वे हमारे आस पास नहीं हैं।


शरीर नश्वर है ,लेकिन व्यक्ति से जुड़ी भावनाएं मन मस्तिष्क में जुड़ी रहती हैं।एक रिक्तता जो उनके अलविदा के बाद भी बनी हुई है।