क्यों होते हैं ऐसे लोग
जो घिनौने चेहरे रखते हैं
टपकती है वहशियत आंखों से
काले काले पहरे रखते हैं 

माधव एक बहुत ही गंदी फितरत का आदमी था , उसे संयोगिता किसी भी कीमत पर चाहिए थी, वो उसे पाने के लिए कोई भी चाल चल सकता था, कोई भी गंदा खेल खेल सकता था। उसके लिए किसी की इज्जत मान मर्यादा से कोई मतलब नहीं था। वो भी राजपूत था लेकिन जहां मानवेंद्र सबको मान सम्मान देने वाला सच्चरित्र व्यक्ति थे वहीं माधव एक विलासी और क्रूर इंसान था।

   मानवेंद्र रोज सुबह गांव में भ्रमण के लिए जाता था   ताकि गांव के लोगों के बारे में जान सके । और अगर किसी को कोई परेशानी हो तो दूर कर सके। माधव अक्सर किसी न किसी शिकार की तलाश में रहता था ताकि वो उसे अपनी वासनापूर्ति का साधन बना सके। उसे यह मौका जल्दी ही मिल गया। उसने रात के अंधेरे में अपनी पहचान को छुपाकर एक स्त्री की गरिमा को कलंकित कर दिया। और चुपचाप हवेली में आकर सो गया । सुबह जब हवेली के सामने उस औरत ने फरियाद लगाई तो  मानवेंद्र उस मामले की तहकीकात के लिए गांव में चला गया। माधव को डर लग रहा था कि कहीं वो औरत उसे पहचान न ले। इसलिए वो मानवेंद्र के साथ गांव नहीं गया था। और चुपचाप अपने कमरे में पेट दर्द का बहाना बना कर लेटा रहा। दादी सा कई बार उसके पास अपनी छड़ी टेकती हुई आई । वो अपने नवासे माधव के लिए बहुत परेशान थीं। माधव ने कुछ रुपयों का लालच देकर एक नौकरानी को अपने साथ मिला लिया था और अपने प्लान को अंजाम देने की पूरी तैयारी कर रहा था।
संयोगिता के पास वो नौकरानी घबराई हुई गई और बोली

बाई सा, देखिए तो, हमारे मेहमान कुंवर सा को बहुत अधिक पेट दर्द हो रहा है हुकुम अपने कमरे में सो रही हैं। वो दर्द के मारे तड़प रहे हैं। उनकी हालत बहुत खराब है । कुंवर सा गांव में गए हैं । आइए चलिए , देखिए उन्हें क्या हुआ है?

संयोगिता घबरा कर तुरंत उस नौकरानी के साथ चल दी। आखिर माधव दादी सा के और  इस घर के रिश्तेदार हैं। उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी हमारी बनती है।
संयोगिता जब माधव के कमरे में पहुंची ।तो नौकरानी ने धीरे धीरे बाहर जाकर उनके कमरे को बंद करके सिटकनी लगा दी। माधव बिस्तर पर नहीं था वो कमरे के एक कोने में परदे के पीछे छुप गया था। संयोगिता ने जब माधव को नहीं देखा तो उसे आवाज़ दी। माधव ने कराहते हुए ऐसा बहाना बनाया मानो उसे असहनीय दर्द हो रहा है। संयोगिता घबरा गई, उसने कहा

माधव जी, आप आराम से बिस्तर पर लेटिए। हम अभी दादी सा को बुलाकर लाते हैं, आपको डॉक्टर की सख्त जरूरत है। संयोगिता कमरे से बाहर जाने लगी।तभी माधव उसके ऊपर झुक गया मानो उसे खड़े होने में भी तकलीफ हो रही है। संयोगिता ने उसे संभालकर बिस्तर पर लिटाना चाहा तो वह जानबूझकर और झुक गया ऐसा लग रहा था कि मानो वो अपने होश में नहीं है। संयोगिता को बहुत अजीब सा लग रहा था लेकिन वह यही समझ रही थी कि माधव को बहुत पीड़ा हो रही है। इसलिए उसने उसकी हरकतों पर गौर नहीं किया।जब माधव संयोगिता के गले से लगा हुआ था उसी समय दादी सा और मानवेंद्र ने कमरे में प्रवेश किया । माधव ने उन दोनों को आते हुए देख लिया था तभी उसने संयोगिता को कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और कहने लगा

संयोगिता, आप चिंता मत करिए, हम आपके हैं और हमेशा आपके ही रहेंगे। दुनिया की कोई भी ताकत हमें एक होने से नहीं रोक सकती  । नानी सा से हम बात करेंगे वो हमारा और आपका विवाह जरूर कर देंगी। मानवेंद्र को मैं मना लूंगा। आप परेशान मत हों।

संयोगिता झटके से अलग होकर माधव को विस्फारित नेत्रों से देखने लगी । वो अचानक आई हुई इस परिस्थिति के लिए तैयार नहीं थी । उसे समझ में ही नहीं आया कि ये सब अचानक क्या हो गया। वो भागकर दादी सा और मानवेंद्र के पास गई और उनसे कहा

दादी सा, भाई सा, ये झूठ बोल रहे हैं हमने ऐसा कुछ भी नहीं कहा। इनका पेट दर्द हो रहा था तो नौकरानी ने हमें बताया। आप उस समय सो रहीं थीं। आपके आराम में खलल न पड़े इसलिए हम यहां आ गए  ये हमारे मेहमान है इन्हें कोई तकलीफ न हो इसलिए हम इनकी खैरियत पूछने इस कमरे में आ गए। बस इतनी सी बात है और कुछ नहीं। आप चाहें तो उस नौकरानी से पूछ सकती हैं।संयोगिता उन्हें रो रो कर सफाई दे रही थी। वो भी उस अपराध की, जो उसने किया ही नहीं था।

दादी सा ने उस नौकरानी से आवाज़ दी और उससे सारी बातें बताने को कहा।

नौकरानी डर के कारण थर थर कांप रही थी। जब मानवेंद्र ने उसे कड़ाई से पूछा तो उसने कहा 

हुकुम, माफी चाहती हूं,लेकिन कुंवर सा ठीक कह रहे हैं, छोटी बीबी सा ने ही हमसे कहा था कि हम कुंवर सा के कमरे में जा रहे हैं। किसी को बताना नहीं। हम उन्हें पसंद करते हैं। नौकरानी ने सिर झुकाए हुए कहा। संयोगिता को विश्वास नहीं हो रहा था कि वो उसकी नौकरानी होकर एक बाहर से आए हुए आदमी का साथ देगी। लेकिन वो नहीं जानती थी कि लालच बहुत बुरी चीज होती है। वो अच्छे अच्छों का ईमान डिगा देती है। फिर वो तो एक आम सी इंसान थी।

मानवेंद्र ने उस नौकरानी को गुस्से से देखा और खींच कर एक जोरदार थप्पड़ मारा और कहा

, हम अपनी बहन को अच्छी तरह जानते हैं। वो ऐसा कभी नहीं कह सकती । तू झूठ बोल रही है। ये ही कमीन इंसान  है इसी ने हमारी बहन के साथ बदसलूकी की है, हम इसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे। मार डालेंगे इसे। मानवेंद्र ने  माधव का गला पकड़ लिया।

संयोगिता मानवेंद्र के गुस्से को देखकर भय से कांप रही थी। मानवेंद्र इतना क्रोधित था कि वो माधव को मार ही डालता अगर दादी सा ने उसका हाथ नहीं पकड़ लिया होता।

दादी सा ने मानवेंद्र को चेतावनी देते हुए कहा.......
क्रमशः
संगीता शर्मा "प्रिया"