मां.... ओ मां
तेरी ममता की वो झप्पी
  याद आती है बहुत
जब मैं उदास होती हूं।
भले ही तुझसे कोसों दूर हूं
पर तब मैं तेरे पास होती हूं।
मां... ओ मां
तेरे हाथों के स्पर्श का जादू
मेरी व्यथा दूर कर देता है।
तेरा स्नेहिल आलिंगन
मुझे संतुष्टि में भर देता है
मां ... सुन तो जरा 
तू कोई कैमरा तो नहीं है
मैं रोई थी आज अकेले में
तू कैसे जान जाती है।
चाहे कितना भी मेकअप कर लूं
तू असली रूप पहचान जाती है।
मां .. याद है ना तुम्हें 
जब मैं डगमगाते हुए चलती थी
और तुम मुझे संभालती थी
तेरे ममता के आंचल में 
मैं सो जाया करती थी।
दुनिया के सारे सुख से बढ़कर
मां की ममता भरी निगाह हैं
सारी झप्पियों से सर्वश्रेष्ठ 
ममता की झप्पी की चाह है।

संगीता शर्मा