वो रूहानी अहसास 
होता हैं कितना खास 
छुआ था तुमने मुझे 
नन्हें हाथों से पहली बार
ममत्व का सुखद अनुभव 
पूर्ण नारीत्व का अहसास 
नाज़ुक सी हथेली की गरमाहट 
उतर गई रूह के अंदर तक 
मां बनकर जाना दुनिया 
कितनी है खुबसूरत 
सारे जहां की खुशियां 
तेरे कदमों में न्यौछावर 
ले लूं सारी बालाएं तेरी 
दुआओं से दामन दूं भर 
लग जाएं मेरी उम्र भी तुझे 
तेरे लिए जहां से लड़ जाऊं 
बलिहारी तेरी मधुर मुस्कान पर
ना रहे अधूरे हो पूरे तेरे ख्वाब 
हो कामयाब इतना तू मेरे लाल
 लिखी जाएं इबारत आसमान पर
नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश