तेरी आँखों में छुपा राज है जैसे कोई गहरा,
ऐसा लगता कि तुमपर है कड़ा कोई पहरा।

जब किसी को किसी सेभी है मुहब्बत होती,
दिल भरके फिर दोनों में बहुत हैं बातें होती।

दिन भी लगता है बड़ा छोटा यह रातें छोटी,
चैन आँखें नहीं पातीं जो मुलाकातें न होती।

इश्क ऐसे ही हुआ करता है तड़पता है दिल,
शुकून मिलता है दो दिल जब जाते है मिल।

जन्मों-2 का साथ देने की वो कसम खाते हैं,
एक झटके में बहुत लोग अक्सर टूट जाते हैं।

येवो शै है कि इसे निभाने की है जरुरत होती,
होश खो जाता है इश्क में ये आग ऐसी होती।

दुनिया वालों को मजा आता है रोड़ा बन कर,
जान देते हैं जोड़े कई आग में इसके जलकर।

मुहब्बत के जो दुश्मन हैं खुदा माफ़ करे उनको,
उनके फितरत में यही है चल दिए जन्नत हमतो।

माना कि ये दुनिया वाले हमें चैन से रहने न दिये,
साथ जीने न दिये हमको तो साथ मरने तो दिये।

यही तो अंजाम मुहब्बत का हुआ है हमेशा यारों,
चैन मिलता है जब आशिक व उसकी जाये पारो।

रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.