बिना बात रूठ जाते हैं
कितना कुछ जग से करवाते हैं
पल में तौला पर में माशा
कितनी शैतानी कर जाते हैं
सबके प्यारे जग में सब से न्यारे
चाचा नेहरू के राजदुलारे
बच्चे नटखट ही होते अच्छे
जिज्ञासु और देश हित सहारे
अभिलाषाएं इनकी बहुत है
शौर्य बहुलता का यह गृह है
मार्ग दर्शन हो इनका गर सच्चा
यह तो चलता फिरता प्रकाश पुष्प कुंज है ।।
शीतल शैलेन्द्र सिंह राघव "देवयानी"
इन्दौर

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