छठ पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला हिन्दुओं का धार्मिक पर्व है, जिसमें मूर्ति पूजा नही बल्कि प्रत्यक्ष रूप में  दिखाई देने देवता सूर्यदेव की पूजा विधि विधान से की जाती है! 
सूर्य उपासना का पावन पर्व भक्तों की आस्था एवं विश्वास का पर्व है! 
मुख्य रूप से ये पर्व  बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, एंव नेपाल के तराई क्षेत्र मे हर्षोल्लास से मनाया जाता है! 
भारत मे ये पर्व वैदिक काल से मानाया जाता रहा है, खासकर यह पर्व बिहार  की वैदिक संस्कृति माना जाता है! 
मुख्य रूप से ॠषियों द्धारा रचित, ऋग्वेद , में सूर्य पूजन,   उषा पूजन, और आर्य पंरपरा के अनुसार  यह पर्व बिहार की तपोभूमि  में अशीर्वाद एंव सौभाग्य माना जाता है! 
इस पर्व के संदर्भ में बहुत सारी कथायें है! 
प्रथम देव संग्राम  में देवो, असुरों की लडाई मे, देव माता अदिति ने, तेजस्वी पुत्र की कामना हेतु, जगतजननी माँ जगदम्बा शक्ति स्वरूपा, छठ माता का आवाहन किया किया, 
माँ छठी के अशीर्वाद से भगवान अदित्य को पुत्र रूप में प्राप्त किया था! 
जिन्होंने, देवताओं की असुरों पर विजय दिलवायी थी! 
पहले दिन नहाये खाये से प्रारंभ चार दिवसीय  यह पर्व सौभाग्य का प्रतीक होता है! चने की दाल, लौकी भात , विशेष व्यंजन, ग्रहण करने के बाद, व्रत की शुरुआत हो जाती है! 
और उदयमान सूर्यदेव को दिऐ जाने वाले अर्ध्य से इस व्रत का समापन होता है!
छठ पर्व की महत्ता को कौन नहीं जानता। लोक आस्था का पर्व छठ महापर्व में भगवान सूर्य की उपासना व आराधना की जाती है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को चार दिन चलने वाले इस महापर्व को व्रती बड़ी ही नियम, निष्ठा और कठिन तप से करती हैं। भगवान सूर्य और उनकी बहन माता छठ की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। चार दिवसीय व्रत नहाय-खाय, खरना, अस्ताचलगामी तथा उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न हो जाता है। छठ माई और भगवान आदित्य सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। इस व्रत के नियम बहुत कठिन है जिनका पालन व्रतियों को अत्यंत कड़ाई से करना पड़ता है। भगवान भास्कर और माता छठ जितना शीघ्र प्रसन्न होकर शुभ तथा मनोवांछित फल का वरदान देते हैं वहीं नियम में तनिक भी चूक से कड़े दंड का भागी बनना पड़ता है। इसलिए इसे महापर्व की संज्ञा दी गई है।
बिहार के वासी हर राज्य में निवास करते है, प्रवासियों की वजह से ये व्रत  पूरे भारत में मनाया जाता है! 
इसलिए आज की तारीख मे ये व्रत महापर्व के रूप में प्रसिद्ध है!! 

      रीमा महेंद्र ठाकुर, सहित्य संपादक "वरिष्ठ लेखक"
राणापुर झाबुआ मध्यप्रदेश भारत