आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में, बिना बात के ही बिखर जाते हैं परिवार
छोटी-छोटी बातों पर होता रहता है झगड़ा
झगड़ा,झगड़ा ना होकर, बन जाता है कानूनी लफड़ा
ना जाने कितने वर्षों का साथ
टूट जाता है बस एक ही पल में
फिर ना कोई सोचता है आज के बारे में और ना ही सोचता है क्या होगा कल मे
ज़िद और झूठे अहंकार के सामने होते हैं बेबस लाचार
आखिर भला ऐसे कब तक चलेगा परिवार
दोनों के मध्य स्वाभिमान अड़ा है
ना कोई छोटा है ना कोई बड़ा है
झुकने में शर्माते हैं बात बात पर एक दूजे को चिल्लाते हैं
मौका मिलते ही दोनों एक दूजे को गलत दिखाते हैं
आज हर रिश्तो में मची हुई है खींचातानी
हर घर की हालत है ऐसी, हर घर की है यही कहानी
रिश्ते बचाना मुश्किल है उतना हाथ में लेकर जैसे पानी,
झूठ और झूठे वादों की यहां पर भरमार है,
तभी तो आज बिखर रहा परिवार है
धन्यवाद
सत्येंद्र पाण्डेय 'शिल्प'
गोंडा उत्तरप्रदेश

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