हम दो हमारे दो की चले रीत।
लक्ष्य रहे अपना सुनो मेरे मीत।
सदा हम सब में बनी रहे प्रीत।
इसी नारे का गायें सब गीत।
एक राजा बेटा हो,एक रानी बिटिया।
हम दोनों के गोद में खेले बेटा-बिटिया।
तीसरे की जरूरत क्या,यहीं कितने मिठियां।
इनकी सलामती हेतु रब को भेजे चिट्ठियां।
ईश्वर यदि दो बेटे दे तो कर लो कबूल।
रब यदि दो बेटी दे फिर भी ना तोड़ो उसूल।
किसी की प्रतीक्षा में परिवार बढ़े ना हो भूल।
हम दो हमारे दो उद्येश्य बने जीवन का मूल।
-चेतना सिंह

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