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गुज़रता था मनमौजी जीवन हमारा
अपनों से भरी दुनिया का मेला होता था
जाने कहा खोगया वो जमाना खुशी का
जैसे हमारा सुहानी बचपन बितता था

ना कोई गम की तूफान दिल में
न आँखों में दर्द की कोई नमी होता था
कितना खुशनुमा पल था वो ज़िन्दगी का हमारी
जो कभी हँसी बचपन हुआ करता था

बदला वक़्त पल में ऐसे सुबह से शाम होगयी जैसे
यादो में रह गया खोके जो हमारी हकीकत था
हर पल खुशियों की मेले जैसे हमारे
क्या खूब वो दिलकश हमारा बचपन था

वो गलियों में दोस्तों के साथ खेलना हमारा
थक कर माँ के आँचल तले बेफिक्र सोजाना
जाने कहाँ गुम होगए वो पल ज़िन्दगी के
अपनों के प्यार से भरा जो हमारा बचपन था

वो दीदियो को बार बार तंग करना हमारा
उनके रूठ जाने पर उनसे ही लिपट जाना
कितना खुशगवार था वो दिन ज़िन्दगी के
जो प्यार ही प्यार भरा हमारा बचपन था

पापा के हाथ पकड़ कर त्यौहारो में जाना
भईयों से हर बात पर बेवजह टकरा जाना
फिर आकर मुझे दुलार से मनाना उनका
कितना अपनापन से भरा हमारी हँसी बचपन था

वक़्त के साथ हर किसीका जो ज़िन्दगी बदला
कोई जुड़े रहे तो कोई गाँव से शहर को बस गया
बस रह गया है कैद दिल के कमरे में यादें सुहानी
बहुत याद आता है दिल को जो कभी हमारी बचपन था

खूबसूरत अहसास बनके जो दिल में कैद सीने में
दिल करता है काश वो कुछ पल फिरसे हम जी लेते
फिरसे मुस्कुराते नैना खिलखिलाकर हम दिल से
जैसे हँसता मुस्कुराता वो हमारा खूबसूरत बचपन था....!!
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नैना.... ✍️✍️