घर की बुनियाद होता है पिता
स्वभाव में कठोरता
हृदय से विशाल होता है पिता
खुद को झोंक कर जीवन की चक्की में
2 जून की रोटी का जुगाड़ है पिता
कभी तो वट वृक्ष की ठंडी छाँव से
कभी नारियल के सख्त खोल सा
पिता से जीवन का अस्तित्व
पिता से ही मेरा है व्यक्तित्व
कभी तो चलना सिखाये पिता,
कभी तो जीना सिखाये पिता
खुद थक जाने पर भी हमको
अपने कांधे बिठाये पिता
वो कहते नहीं किसी से कुछ भी
अपने आँसुओ को सबसे छिपाये पिता
माँ का जीवन और हमारे जीवन का अर्थ है पिता
पिता से जीवन में है
कभी प्यार का सागर
कभी डांट का भंडार है पिता जिम्मेदारियों का मज़बूत स्तम्भ है पिता
कभी मस्ती का पिटारा
तो कभी अनुशासन का पाठ है पिता
माँ से तो कर लेते है हर बात हम
पर जो बिना बात किये हमको समझे वो होता है पिता
मेरे चेहरे की मुस्कान है पिता
मेरे जीवन का सम्मान है पिता
मेरे जीवन की पहचान है पिता...
निकेता पाहुजा ✍️

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