अगर लिखा ना होता तकदीर में गरीबी
तो आज़ ये ज़िन्दगी कुछ अलग होती
न करना पड़ता मजदूरी छोटी सी उम्र में
मैं भी आज अपने छोटे भाई बहन के साथ स्कूल में होती
काश मैं ऐसा कुछ कर पाती की
मैं नहीं तो अपने भाई बहनो को पढ़ा लिखा पाती
गर होता आज दूसरे बच्चों सी नसीब तो
मैं भी आज अपने छोटे भाई बहन के साथ स्कूल में होती
ईश्वर जाने किस गुन्हा का सज़ा देरहा है
मेरे परिवार को ही छोड़कर सबको खुशियाँ देरहा है
गर पढ़ती घर की ज़िम्मेदारी इस उम्र में सर पर मेरे तो
मैं भी आज अपने छोटे भाई बहन के साथ स्कूल में होती
आज इतना मजबूर है ज़िन्दगी हमारी की
एक पहर का खाना या पीकर पानी दिन गुज़रती है
न हटता सर से अपने बड़ो का साया हमारी तो
आज ज़िन्दगी के एक अलग ही रूप होती
ज़िन्दगी में हमने बस अब एक ही ख्वाब देखा है
चाहे कितना भी हो मुश्किल इस ग़रीबी को मिटाना है
गर होजाते उस ईश्वर का कृपा हम पर तो
मैं भी आज अपने छोटे भाई बहन के साथ स्कूल में होती
भले मैं न पढ़ लिख पाउ इस मुश्किल जीवन में
पर अपनी छोटे भाई बहन को अच्छे से पढ़ाऊंगी
पढ़ कर जिस दिन खड़े होंगे अपने खुद के पैरो पर
उस दिन मैं भी उनके साथ जीवन की मंज़िल पाउगी
मेरा भविष्य जो भी हो ज़िन्दगी का अब
पर इन मासूमों का भविष्य अच्छा बनाऊगी मैं
करुँगी मेहनत ईमानदारी से नैना ज़िन्दगी में अपनी की
एक दिन कामयाबी पर एक मेरा भी नाम होंगी....!!
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नैना.... ✍️✍️💕

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