बिल्लू और मीना दोनों एक गंदी बस्ती में रहते थे। माता पिता दोनों कबाड़ी थे ,सुबह ही निकल जाते थे।बिल्लू की मां चाहती थी की दोनों बच्चे शिक्षा ग्रहण करें,लेकिन बिल्लू का पिता चाहता था कि बिल्लू बड़ा होकर उसके साथ काम में हाथ बटाए।
बिल्लू और मीना को भी पढ़ने में बहुत दिलचस्पी थी, वे कुशाग्र बुद्धि के थे।
दोनों माता पिता के जाने के बाद वहीं पास के स्कूल चले जाते ,वहां गेट पर एक दरबान खड़ा रहता ,जो उन्हें देखते ही भगाने लगता।
फिर उससे नजरें बचा वहीं चहारदीवारी के पास दोनों भाई बहन खड़े हो बच्चों को देखते। बच्चे जब बाहर खेलते तो उनकी इच्छा होती कोई उन्हें भी बुला ले, और वे भी उन बच्चों के साथ खेलें।
सुबह की प्रार्थना तो उन्हें रट गई थी। जाड़े में बच्चों की क्लास बाहर ही लगती तो वे बहुत खुश हो जाते क्योंकि उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिलता।
एक दिन दोनों से रहा नहीं गया ,दोनो चहारदीवारी में लगे कांटे को उठा कर अंदर घुस गए(,कपड़े भी उनके फट गए)और वे चुपचाप से अपने उम्र के बच्चों में बैठ गए।
मास्टर साहब पढ़ा रहे थे,अचानक उनकी नजर दोनों पर पड़ी तो उन्होंने उनको उठाया और पूछा तुम लोग कौन हो,यहां क्या कर रहे हो?
उन्होंने बताया , हमें भी पढ़ना है ।
तुमने एडमिशन करवाया ?
हम बहुत गरीब हैं, हमारे पास स्कूल की फीस देने को पैसे नहीं है।
शिक्षक , उन दोनों को प्रधानाचार्य के पास ले गए।
प्रधानाचार्य ने दोनों की बातें सुनी ,उन्होंने कहा तुमलोग 15 दिन नियमित स्कूल के श्यामपट ,और बेंच की सफाई करो।
दोनों पूरी लगन से दिए गए काम करते और शिक्षक के पढ़ाए पाठ को सावधानी पूर्वक सुनते।
15 दिन के बाद प्रधानाध्यापक ने उनकी लगन देख मुफ्त में स्कूल में प्रवेश दे दिया।स्कूल के सभी शिक्षकों ने चंदा लगा उनके लिए कपड़े , बैग खरीद कर दिए।
अपनी मेहनत और लगन से दोनों बहुत अच्छे मुकाम पर पहुंच गए।
समाप्त।

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