कितना सुन्दर था बचपन
काश लौट आए फिर बचपन
दिन भर की धमाल मस्ती,
चुपके से खा लेना मिट्टी
खेल पुराने बचपन के
वो गीत सुहाने बचपन के
याद आती है दादी नानी की कहानी
कितना मधुर था कुएं का पानी
दिन भर बैठना पीपल की छांव मे
घूमते थे दिन भर जब हम नांव मे
ना दिन की चिंता ना रात की परवाह
अति मस्ती आनन्द उछाह
ना सपने ना कोई काम
खेलो खाओ भरपूर आराम
कितना अच्छा होता है बचपन
तन पर् होती थी मिट्टी
पर साफ सुथरा था मन
आज बहुत कुछ है अपने पास

पर वो प्यारा बचपन नहीं
बचपन ना सही,बचपन की यादें ही सही

कोई ले ले सारा धन
बस लौटा दे वो बचपन

धन्यवाद
सत्येंद्र पाण्डेय 'शिल्प'
गोंडा उत्तरप्रदेश