बीत रहा है पल पल
हर लम्हा हर एक क्षण
बीत न जाए यूं ही एक दिन
ये सुंदर सा जीवन.....

इसको खोने से पहले क्यों ना
खुद से भी कभी मिल लें हम
एक मुलाकात कभी 
खुद से भी कर लें हम.....

भाग रहें हैं ऐसे जैसे
दौड़ हो कोई ये जीवन
खोकर सुकूं को खुद ही
आराम ढूंढ रहे है हम.....

बिन पहचाने ही खुद को
इम्तिहान दे रहे हैं हम
जाने किस मकाम पर 
खुद को देख रहे हैं हम.....

कभी तो दो पल खुद से भी
रूबरू हो लें हम
दुनियां को जानने से पहले
कभी खुद को जान लें हम.....

बैठ सुकूं से दो पल 
खुद से बातें कर लें हम
मन में दबे हुए सपनो को 
कभी साकार कर लें हम
कभी कभी खुद से भी
एक मुलाकात कर लें हम.....

इस बनावटीपन को
दरकिनार कर लें हम
कभी कभी खुद से 
एक मुलाकात करलें हम.....


कविता गौतम...✍️