" यह सिलसिला रोज का होने लगा है कोई एक दिन की बात नहीं है अब तुम हर रात शराब के नशे में घर आते हो अब मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती अब तुम्हें कोई न कोई फ़ैसला लेना ही होगा तुम्हें पत्नी और बच्चे प्यारे हैं या शराब यह निर्णय तुम्हारा है।अब मेरे बर्दाश्त की सीमा समाप्त हो गई है बच्चे बड़े हो रहें उनके जीवन पर तुम्हारी इस हरकत का क्या असर पड़ेगा तुम्हें इसका अहसास ही नहीं पर मैं अपने बच्चों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं कर सकती"सुहाना ने गुस्से में भरकर कठोर शब्दों में अपने पति सुनील से कहा।
सुनील ने गुस्से में सुहाना को देखा और बोला यह मेरा घर है तुम कौन होती हो मुझ पर हुक्म चलाने वाली मैं शराब नहीं छोडूंगा रहना है तो रहो वरना जहां चाहो चली जाओ तुम्हारे जैसी औरत की मुझे जरूरत नहीं है जो अपने पति को अपने इशारों पर नचाने की कोशिश करे" इतना कहकर सुनील अपने कमरे में चला गया सुहाना आश्चर्यचकित होकर अपने पति के इस रूप को देखती रह गई उसे अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि, सुनील ऐसा भी कह सकता है तभी वहां उसकी सास आ गई और सुहाना को गुस्से में देखते हुए बोली,
" बहू अपने पति से इस तरह बात की जाती है?औरत हो औरत की मर्यादा में रहो माना की शराब पीना गलत है पर क्या इसकेे लिए तुम अपने पति का घर छोड़कर चली जाओगी यहां से जाओगी कहां मायके में तो ठिकाना है नहीं तो क्या फुटपाथ पर रहोगी या किसी धर्मशाला में मेरा बेटा शराब पीकर आता है पर तुम्हारी सभी जरूरतों को पूरी भी करता है तो तुम्हें उससे क्यों शिकायत है अगर तुम घर छोड़कर जाना चाहती हो तो जाओ पर बच्चे यहीं रहेंगे अपने पिता के साथ तुम बच्चों को दहेज़ में लेकर नहीं आईं थीं इसलिए उन्हें अपने साथ ले जाने के विषय में सोचना भी नहीं" सुहाना की सास ने भी व्यंग्यात्मक लहजे में धमकी देते हुए अपने बेटे का पक्ष लिया।
" मां जी आप कैसी मां हैं जो अपने बेटे की बुराई को भी नज़रंदाज़ कर रहीं हैं शराब पीकर अपने शरीर और पैसे की बरबादी करना मर्दानगी नहीं है यह बेवकूफी है और आप मुझे इस बात का ताना न दीजिए कि, मैं कहां जाऊंगी मैं पढ़ी-लिखी हूं अपना और अपने बच्चों को पाल सकती हूं मैं कुछ भी काम कर लूंगी अगर मुझे कोई नौकरी नहीं मिली तो मैं घरों में बर्तन साफ करने का काम कर लूंगी पर एक शराबी आदमी के साथ नहीं रहूंगी शराब पीने वाले व्यक्तियों का अंत क्या होता है वह सभी को पता है। मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी कि आप अपने बेटे को समझाने की जगह मुझे ही दोषी ठहरा देंगी।
जहां तक रहा बच्चों का सवाल है बच्चे तो मेरे साथ ही रहेंगे कानून भी इसमें मेरा ही साथ देगा अगर आप चाहतीं हैं कि आपके बेटे का घर बर्बाद न हो तो आप अपने बेटे को समझाइए कि,वह शराब पीना छोड़ दें नहीं तो मैं अपने बच्चों को लेकर यहां से चली जाऊंगी और तलाक़ के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगी यह मेरा आखिरी फैसला है"
सुहाना ने भी गुस्से में कहा और वहां से चली गई उसकी सास को उसके चेहरे पर दृढ़ता साफ़ दिखाई दे रही थी जैसे उसने निर्णय ले लिया हो अगर उसके पति ने अपनी आदत को नहीं सुधारा तो वह अपने बच्चों के साथ इस घर को छोड़कर चली जाएगी बहू के घर छोड़कर जाने की बात को सोचकर उनके चेहरे पर भी चिंता की लकीरें उभर आई उन्होंने तो बहू को धमकी इस लिए दी थी कि,वह डर कर चुप रहे पर यहां मामला उल्टा पड़ गया उन्होंने बेटे को समझाने का फ़ैसला कर लिया।
डॉ कंचन शुक्ला
स्वरचित मौलिक

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