एक झूठी सी मुस्कान,
      आँसुओ को छुपा कर
करती है मुझपर एहसान
     एक झूठी सी मुस्कान..........।

वो नहीं समझते मन को मेरे,
     मैं आँखे पढ़ सब लेती जान
एक झूठी सी मुस्कान
       करती मुझपर एहसान.......।

सोचती हूँ बता दूँ उनको,
     अपने दिल का हर अरमान
डरती हूँ इस बात से कहीं गलत ना बैठे मान
   एक झूठी सी मुस्कान
   करती मुझपर एहसान........।

ऐ,मेरे आँसू दूर हो जा मेरी आँखों से,
     बहुत कर लिया मुझे परेशान
नहीं चाहिए मुझे तेरा एहसान!!!!!!

तेरे एहसान से मैं खो दी अपनी पहचान,
अब लाऊंगी मैं एक सच्ची मुस्कान
बताऊंगी मैं सबको दिल के अरमान
        गलत नहीं हूँ मैं !!!
बस मेरा दिल है नादान..............।☺😊
                                 ऋचा कर्ण✍