तिमिर का आवरण फैला हुआ था धरा में
और एक नन्हा दीपक तभी आ गया
जल उठा स्नेह वर्तिका को हृदय में लिए
हर मनुज के जीवन में उल्लास आ गया
विश्वास की किरणें जगमगाने लगी 
चहुं ओर खुशियों का प्रकाश छा गया
मैत्री भाव सबके अंतर्मन में जगा है
हर कलुषित विचारधारा को भगा दिया
फूटे पटाखे मन में आह्लाद से सबके
हंसी की फुलझड़ियों से घर सजा दिया
जली हैं दीपमालिकाएं अनगिनत  कतारों में 
सुख शांति और वैभव को अंदर बुला लिया
बनाकर प्रेम रंगों से सुंदर रंगोली द्वार पर
हर मानव हृदय में प्रेम दीपक जला दिया

पंच दिवसीय दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं
संगीता शर्मा