वर्षा के पानी से खेतवा है यह भराई।
आवा चली हो सखी इ धनवा लगाई।।

हरे हरे धनवा कै इहै जो है बेरनिया।
घरवा कै सब मिल लगावैं बेरनिया।।

खेतवा मा सब मिलि गउनई भी गाई।
जेहसे न लागै केहू के तनिकौ थकाई।।

मटमैला जो भरा खेतवा मा अहै पानी।
लगि जाई धनवा तौ लागै लागे सुहानी।।

हरी भरी धरती देखाय लागी इ सजनी।
धनवा कै ई बेरनिया है रचि रचि बढ़नी।।

फुटिहैं जौ बलिया धनवा कै मोरी सुगनी।
खेतवा लहलहाए हरा भरा जैसे फगुनी।।

पकिहैं जौ खेतवा में धनवा कै फसलिया।
जियरा जुड़ाय जाई ई देख के सजनिया।।

चालू होइहैं धनवा कै अपनी फिर कटाई।
सुखाय जाये खेतवा मा जौ होइहैं मड़ाई।।

अलग होइहैं धनवा कै फिर एक-1 बाली।
पैरा औ धान होई जइहैं अलग-2 खाली।।

चारा मिलिहैं गोरुवन के धनवा भी सुहाई।
धनवा इ लइके मशिनिया से होइहैं कुटाई।।

नीक नीक चाउर फिर निकरिहैं मोर भाई।
भूसी अलग होइहैं चाउर अलग होई भाई।।

केहू तौ धनवा कै ई भुंजवां से लाई बनवइहैं।
केहू ई धनवा से परमल व चिवरा बनवइहैं।।

केहू कहि भुंजवा से धाने कै लावा बनवइहैं।
लड़िकन के शादी बियाहे मा लावा परछिहैं।।

आई जौ दिवाली तो देवतन का एहसे पूजिहैं।
केहू इहै चउरा भुंजैहैं औ ताजी लाई बनवइहैं।।

मीठ-2 गुड़वा मिलाय के गुल्लइया बनवइहैं।
केहू नमक मिर्चा पियाज संगे इहै लाई चबैहैं।।

चिड़ियन का दाना पानी देईहैं अपने दुआरे।
किसानन के बले बूते सबजन होइहैं सुखारे।।

रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़सिटी,उ.प्र.