हर बच्चे का बचपन यादगार नहीं होता!
बचपन में ही जो यतीम , यसीर हो जाते ,
उनका बचपन ,बचपन नही रहता!
बचपन में ही वे बड़े हो जाते,
रोज़ी - रोटी जुटाने की जद्दोजहद मे लग जाते!
फटे पुराने कपड़े पहनते ,टूटे - फूटे सामान से खेला करते,
खाने के लाले, पढ़ाई कैसे कर पाते!
जैसे तैसे पल पुस कर बड़े हो जाते!
अब कोरोना ने कहर बरपाया !
ना जाने कितने बच्चों के सिर से
माँ - बाप का साया  उठाया !
कहीं उनका बचपन 
दुखों से ना भर जाये,
आओ उनका बचपन बचाने की
कोशिशें की जायें ।।

शायरी
किसी के बचपन की खुशियॉ मिटने ना दें,
उसे बचाने का थोड़ा प्रयत्न करे..
आओ हम उनमे अपना बचपन फिर से जी लें !
हुमा अंसारी