रंग बिरंगी दुनिया के सतरंगी सपने,
कुछ हैं पराए, और कुछ हैं अपने,
कुछ पूरे  हुए, पर कुछ हैं अधूरे,
जाने कब वो पूरे होंगे सपने अपने,

हर चाहतें पूरी कब होतीं हैं,
एक पूरी हुई ,दूसरी खड़ी होती है,
ख्वाहिशें मन को सदा जिंदा रखती हैं,
गर ख्वाहिशें न हो मन मे तो उदासी ही रहती है,

जिंदगी तेरे इन रंगों से हमने भी यारी कर ली,
इंद्रधनुष के सातों रंग ,अपने जीवन में भर ली,
मन अब कल्पना की उड़ान भरने लगा है,
सारे सपने  होंगे पूरे ,अब लगने लगा है....

                                     -नेहा शर्मा