घर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है रसोई । घर में चाहे और कुछ हो या ना हो एक रसोई और एक बाथरूम अवश्य होना चाहिए । बैडरूम ना हो तो भी चलेगा । अरे भाई , इतने सारे लोग फुटपाथों पर भी तो सोते हैं न । तो घर में खुले आंगन में सो जायेंगे तो कौन सा फर्क पड़ जायेगा । रही बात "रात्रि कार्यक्रम" की तो वो तो जब एक कमरे में सब लोगों के सोते हुये हो सकता है तो फिर आंगन में भी हो सकता है । मगर रसोई के बिना काम नहीं चल सकता है ।
सुबह चाय से लेकर लंच, डिनर और फिर दूध तक सब कुछ रसोई से ही चलता है । घर में सबकी निगाहें रसोई की ओर ही रहती हैं । सब लोग सूंघते रहते हैं कि रसोई में क्या पक रहा है । और तो और लोग तो दूसरों की रसोई को भी सूंघते रहते हैं । वैसे दूसरों की रसोई को सूंघने में जो आनंद है वह आनंद तीनों लोकों में कहीं नहीं है । हम भारतवासी तो जिंदा ही खाने के लिए रहते हैं । जिस दिन उपवास करते हैं उसके अगले दिन दुगना खाते हैं । लोग यहां कम खाने से नहीं मरते , ज्यादा खाने से मरते हैं । शादी समारोहों में हम लोग जाते ही खाने के लिए हैं । नेता, अफसर, कर्मचारियों को अगर "खाने" को नहीं मिले तो फिर वे सरकार में रह कर क्या करेंगे ? इसलिए जहां रसोई वहीं रौनक होई । मतलब जहां "खाने" को मिलेगा उसके "भाव" तो बढ़ेंगे ही ना । जहां ज्यादा "खाने"को मिलेगा वहां का "भाव" उतना ही ज्यादा होगा ।
ये रसोई ही तो है जहां गृहणियों का सबसे अधिक समय गुजरता है । इसलिए आदमी चाहता है कि बाथरूम सबसे सुंदर बने क्योंकि एक वही तो जगह है जहाँ वह आत्मिक ज्ञान , स्वर्गीय आनंद और क्रांतिकारी विचार पाता है । इसलिए लोग बाथरूम को सर्वाधिक सुविधाओं वाला स्थान बनवाते हैं । और सबसे बड़ी बात यह है कि एकमात्र यही जगह होती है घर में जब पति वहां निश्चिंत होकर कुछ समय गुजार सकता है । पत्नी के अचानक आने का खतरा नहीं होता है वहां पर । अत: वह बाथरूम में इटालियन टाइल्स लगवाता है । पुस्तकालय भी बनवा लेता है । जक्कूजी भी लगवा लेता है । और भी बहुत कुछ करवा लेता है अपने पसंद का ।
इसी तरह महिलाओं के लिए रसोई बनी है । महिलाओं की पसंदीदा जगह रसोई है । हमने अनेक कहानियों में भी पढ़ा है कि मां हरदम रसोई में ही पायी जाती है । इसलिए वह रसोई अपनी पसंद से ही बनवाती है । कौन सी चीज कहाँ रखी है यह वही बता सकती है और कोई नहीं । हम मर्दों को तो अपने मोजे सामने पड़े होने के बावजूद नजर नहीं आते हैं तो बाकी की चीजें कैसे नजर आयेंगी ।
जिस तरह घर में रसोई का महत्व है उसी तरह रसोई में खिड़की का भी महत्व है । खिड़की के कारण रसोई से निकलने वाली धुंआ बाहर जाती है और ताजी हवा अंदर आती है । अगर रसोई में खिड़की ना हो तो ? खांसते खांसते दम घुट जाता है घरवालों का । एक बात और रसोई की खिड़की से ताजी हवा अंदर आती है तो वह रसोई में रखी सब्जी, फलों वगैरह को भी ताजा रखती है । अगर ताजी हवा नहीं आये तो सब खाद्य पदार्थ खराब हो जायें । इसलिए रसोई की जान होती है उसकी खिड़की ।
खिड़की से घर में आने जाने वालों पर भी नजर रखी जाती है । रसोई इस तरह बनाई जाती है जिससे उसकी खिड़की से मैन गेट नजर आता रहे । चूंकि गृहिणी का सबसे अधिक समय रसोई में ही गुजरता है इसलिए इस खिड़की के कारण गृहिणी को हर आने जाने वाले की खबर रहती है ।
एक और बात है । रसोई की खिड़की अगर पड़ोसिन की छत की ओर या उसकी रसोई की खिड़की की ओर खुलती है तो दोनों सहेलियां घंटों बातें कर सकती हैं । जब दोनों औरतें बतियाती हैं तो समय का पता ही नहीं चलता है । दुनिया की बातों से लेकर मौहल्ले भर की बातें इसी खिडक़ी की मदद से की जा सकती हैं । इसलिए यह खिड़की केवल रसोई की ही जान नहीं है अपितु मालकिन की भी जान होती है । इसी खिडक़ी के कारण न जाने कितनी तख्ता पलट की योजनाएं बनी हैं आज तक । कितने घरों में महाभारत हो चुका है इसकी तो गिनती ही नहीं है । कितने घर टूट चुके हैं इसका अंदाजा ही नहीं है । बड़ी आवश्यक चीज है यह खिड़की मगर बड़ी खतरनाक भी है । इसी खिड़की के सहारे कभी कभी छमिया भाभी के भी दीदार हो जाते हैं हमें । मन प्रसन्न हो जाता है जब छमिया भाभी के दीदार हो जाते हैं । श्रीमती जी ने एक बार देख लिया हमें उनके दीदार करते हुये । बस, तभी से यह खिड़की बंद रहती है । और हम बस आहें भरकर रह जाते हैं और बरबस गुनगुना उठते हैं ।
मेरी दुश्मन है ये मेरी उलझन है ये
बड़ा तड़पाती है दिल तरसाती है
ये खिड़की खिड़की ये खिड़की
ये खिड़की जो बंद रहती है ।
हरिशंकर गोयल "हरि"

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