आज तो हुस्न का मेला सज रहा है । बड़ी चहल पहल है । किसी को रत्ती भर भी फुर्सत नहीं है । हर फूल पे बहार है । हर कली पे निखार है । दर्पण को भी गुमां हो रहा है जैसे कि वह खुद भी जवां हो रहा है । 
हुस्न अपने सारे हथियारों की धार पैनी कर रहा है । बालों को संवारा जा रहा है । नागिन की तरह से डसने को लालायित हो रहे हैं ये रेशमी बाल । इनमें गजरे की सफेद लड़ी ऐसे शोभा दे रही है जैसे श्यामल गोरी की श्वेत दंत पंक्ति । माथे पर टीके और सिंदूर ने इस नागिन को और भी खतरनाक बना दिया है । पतियों, प्रेमियों और आशिकों का तो जनाजा निकलना तय है आज । 

माथे की बिन्दी ने श्रीकृष्ण के चक्र सुदर्शन की तरह धमाल मचाकर रख दिया है । यह बिंदी आशिकों के दिलों के टुकड़े टुकड़े कर रही है . आशिकों की ऐसी दयनीय हालत देखकर हुस्न को खुशी हो रही है । किसी ने सच ही कहा है कि 

बड़े बेमुरव्वत होते हैं ये हुस्न वाले 
गोरे गोरे चेहरे और दिल काले काले 
तीखे तीखे नैन बड़े ही कातिल, मतवाले 
आशिक बेचारे दिल अपने कैसे संभाले 

भौंहों की कोरों को और नुकीली किया जा रहा है । आंखों में सुरमा डालकर नशे की मात्रा बढ़ाई जा रही है । आई लाइनर से आकर्षण की कशिश और बढ़ाई जा रही है । पता नहीं क्या होगा मर्दों का । तीखे तीखे नैनों के नुकीले बाणों से घायल होंगे या नशीली आंखों की मय पीकर लुढ़केंगे , कुछ कह नहीं सकते । बड़ी मुश्किल है भाई । मगर क्या करें पुरुष बेचारे । 

लबों पे लाली क्या इतरा रही है । ना जाने कितने दिलों को हलाल करके मौज मना रही है । लगता है कि उसकी प्यास अभी बुझी नहीं है । अभी तो और भी दिलों को हलाल करने की तमन्ना बाकी लगती है । 

गालों पर तिल अपनी अलग ही दुनिया में जी रहा है । अमोघ अस्त्र की तरह खुद को तुर्रमखां समझ रहा है । उसे लगता है कि जब सारे हथियार निष्फल हो जायेंगे तब वह अकेला ही दिलों का शिकार कर लेगा । हाय, वारी जावां उसके इस आत्मविश्वास पर । 

चूड़ी, कंगन, पायल, झांझर सब अपने अपने काम में मशगूल हैं । हाथों में मेंहदी सज रही है । पैरों में महावर , आलता लग रहा है । हमारी तो एक ही गुजारिश है हुस्न वालों से कि एक साथ इतने अस्त्र शस्त्र चलाओगे तो बेचारे मर्द भू लुंठित नजर आयेंगे । फिर आपके सौंदर्य की प्रशंसा करने वाला भी कोई नहीं बचेगा । बिना प्रशंसा के हुस्न का क्या मोल ? इसलिए , इतना भी ना संवरना कि कोई जिंदा ही ना बच पाये । माना कि हुस्न का काम तीर चलाने का है पर इश्क के पास ढ़ाल नहीं है , मुफ्त में ही शहीद हो जायेगा बेचारा । अतः संवरना , मगर हलके हलके । 

रूप चतुर्दशी की बहुत बहुत शुभकामनाएं । 
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हरिशंकर गोयल "हरि"