वातावरण तो कर दिया प्रदूषित
सोच को तो स्वच्छ रखो ।।

क्या देंगें हम अगली पीढ़ी को
इतना तो कम से कम याद रखो ।।

चलो नए जमाने के संग मगर
अपनी पहचान तो साथ रखो ।।

बन जाओ मॉर्डन कितने भी
अपनी संस्कृति को तो याद रखो ।।

माना कि आगे बढ़ना है
जीवन को सरल बनाना है ।।

सांस ले सको खुलकर मगर
इतना तो कम से कम याद रखो ।।

आरोप प्रत्तियारोपों से अच्छा है
अपने अपने कर्तव्यों का ध्यान रखो ।।

कोई करे या न करे मगर
तुम ही एक शुरुआत करो ।।

वातावरण और विचारों को
प्रदूषण से मुक्त करो ।।

फैला है बहुत प्रदूषण आज
दुनियां के कोने कोने में ।।

खाना, पानी सब है जहरीला 
हवा को तो शुद्ध करो ।।

लगा अधिक से अधिक पेड़
अपना कर्तव्य पूर्ण करो ।।

खत्म हो रहे गांव हैं आज
शहरों का रूप हुआ विस्तृत ।।

खेतों में बन रहीं इमारतें हैं
अन्न दाता देखो हुआ विचलित।।

दाने दाने को न हो जाएं मोहताज
इतना तो कम से कम ध्यान करो ।।

बढ़ते हुए प्रदूषण को 
कम करने की शुरुआत करो ।।

हो खत्म प्रदूषण सोच का
संस्कारों की ऐसी नींव रखो ।।

कविता गौतम...✍️