आज भी हो जाता है
दिल की धड़कन और सांसे भी थम जाती है
जब कभी उस रात का जिक्र हो जाता है ।
माॅं का ख्याल रखना याद आता है
उनके हाथ का गर्म खाना भी याद आता है
यूं ना बाहर जाओ सर्दी लग जाएगी
उनका यह कहना भी याद आता है ।
सर्द रातों में सीमा पर बैठा
अतीत में झांकता रहता हूॅं
बर्फीली हवाओं के थपेड़े खाकर भी
दुश्मनों के छक्के छुड़ाने की हिम्मत रखता हूॅं ।
कांप रहा था तन फिर भी
हाथों में बंदूक संभाली थी
दुश्मनों के पांव न हमारी धरती माॅं पर पड़े
कांपते मन ने भी यही बात ठानी थी ।
मन में हो जुनून तो
सर्द रात भी रुकावट नहीं बनती
चलने का जोश हो जिसमें
कोई भी राह उसे मुश्किल नहीं लगती ।
धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻
" गुॅंजन कमल " 💓💞💗

0 टिप्पणियाँ