सुधीर बाबू ने अपने साथ लाई हुई किताब के पन्नों को पलटना शुरू किया ही था  तभी उनका बारह  वर्षीय पोता अजय उनके समक्ष आकर खड़ा हो गया उनसे कहने लगा कि आज मैंने अखबार में एक शब्द पढ़ा  है " सूर्य षष्ठी " मुझे इसके बारे में आपसे जानना है क्योंकि आपको तो मैंने जब भी देखा है किताबों को पढ़ते हुए ही देखा है। पापा कहते हैं कि किताबों में बहुत ज्ञान होता हैं और  आप तो इतने बड़े होकर भी हर वक्त किताब पढ़ते रहते हैं तो आपको तो हर चीज का बहुत ज्ञान होगा ही । मुझे सूर्य षष्ठी  के बारे में बताइए ना दादा जी । इसके बारे में  जो भी  आप जानते हैं वह मुझे भी जानना है । 

अपने पोते की बात सुनकर सुधीर  बाबू ने पहले तो उसे अपने पास बैठाया और उसने कहा कि सबसे पहले तुम यह बताओ कि इस छुट्टी में तुम क्यों आए हो ? मैं तो यहाॅं  पर अपने घर में होने वाले छठ पूजा को मनाने आया हूॅं  और हर साल आता हूॅं । हमने पोते की बात सुनकर सुधीन बाबू  मुस्कुरा दिए । चलो तुम्हारी जिज्ञासा को देखते हुए तुम्हें आज सूर्य षष्ठी  के बारे में बताते हैं । सुधीर बाबू ने अपने पति से कहना शुरू किया :- " हमारे हिंदू धर्म के पंचांग के  अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को  आस्था के महापर्व छठ का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सूर्यदेव की बहन छठ  मैया और भगवान सूर्य की पूजा की जाती हैं । शास्त्रों के अनुसार  छठ  व्रत संतान की प्राप्ति  उसकी दीर्घायु की कामना  और उनकी कुशलता के लिए किया जाता है। वैसे तो यह पर्व  चतुर्थी तिथि जिस दिन नहाय-खाय होता है  इस दिन से इसकी शुरुआत हो जाती है । पंचमी तिथि को खरना  और षष्ठी तिथि को छठ व्रत की पूजा की जाती है । यह ही  इकलौता ऐसा पर्व है जिसमें  डूबते हुए सूरज को अर्घ्य दिया जाता है  उसके  अगले दिन सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ्य  देकर  फल फूल और उनके लिए बनाए गए पकवानों के द्वारा  पूजा करने के पश्चात प्रणाम  करके ही  व्रती इस महापर्व का  समापन करते हैं ।  यह सब तो तुम हर साल अपनी दादी को करते हुए देखते ही हो । कल दीपावली है उसके छ: दिन बाद छठ पूजा होगा तो।  इस छठ पूजा में तुम अपनी दादी द्वारा किए गए सभी कामों को ध्यानपूर्वक देखना तभी तुम्हारे समझ में  मेरे द्वारा कही गई बातें आएंगी । वैसे तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूं कि हमारे हिंदू धर्म में पुराणों को सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है  । पुराणों में से एक है ब्रह्मवैवर्त पुराण ।  इसमें लिखा गया है कि ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि को  रचने के लिए स्वयं को दो भागों में बांट दिया था ।  दाहिने भाग में पुरुष और बाएं भाग में प्रकृति देवी  थी ।  प्रकृति देवी  ने  भी अपने आप को छह भागों में बांट लिया और  इनके छठे अंश को  देवसेना के नाम से जाना जाता है। प्रकृति देवी  का छठा अंश होने के कारण इनका एक नाम षष्ठी है  जिसे छठी मैया के नाम से जाना जाता है। जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो बच्चें  के जन्म के छठे दिन भी इन्हीं की पूजा की जाती है क्योंकि इनकी  पूजा  करने से बच्चे को स्वास्थ्य  और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।  प्रकृति  देवी का नाम कात्यायनी भी  बताया गया है और माता कात्यायनी की पूजा  नवरात्रि की षष्ठी तिथि को ही   की जाती है । इसी पुराण में एक कथा  के बारे में बताया गया है । इसके अनुसार मनु के पुत्र राजा प्रियव्रत को कोई बच्चा नहीं हो रहा था इस कारण राजा के साथ-साथ पूरी प्रजा दुखी थी । पुराने जमाने में धार्मिक अनुष्ठान करके पुत्र की प्राप्ति की जाती थी इसीलिए महर्षि  कश्यप के कहने पर राजा प्रियव्रत ने धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन करवाया जिसके कारण राजा प्रियव्रत की पत्नी गर्भवती हुई लेकिन कुछ महीने पश्चात ही वह बच्चा अपनी मां के गर्भ में है मर गया । राजा बहुत दुखी हुए पूरी पड़ जावे सुख में थी तभी आसमान में एक देवी प्रकट हुई । राजा प्रियव्रत ने उनसे पूछा कि वह कौन है ? उस देवी ने कहा कि मैं षष्ठी देवी हूॅं हर समय निसंतान को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देती हूॅं और साथी सभी बच्चों की मैं ही  रक्षक भी हूॅं । कहा जाता है कि उन देवी ने  राजा प्रियव्रत की पत्नी के गर्भ में मरे  हुए बच्चे को फिर से जीवित कर दिया । यह दिल का राजा प्रियव्रत बहुत खुश हुए और षष्ठी देवी  की पूजा करने लगे । लोगों का  मानना यह है कि राजा प्रियव्रत  के षष्ठी  देवी यानी की छठी मैया की पूजा करने के बाद से ही हर साल उस दिन छठी  मैया  की पूजा  की  जाने लगी । " 

यह तो आपने मुझे बहुत अच्छी कहानी सुनाई ।  छठी मैया के बारे में  मैं अपने दोस्तों को  अवश्य बताऊंगा कहता  हुआ सुधीर बाबू का पोता  अपने पिता की तरफ  भागा क्योंकि उसे सबसे पहले अपने दोस्तों को सूर्य षष्ठी  के बारे में जो बताना था ।

           ##### समाप्त ########


                                                  धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻


" गुॅंजन कमल " 💓💞💗