अहसासों की चादर पे मुस्कुराहटों के फूल खिलाये हैं 
ये दुनिया हसीं लगने लगी जब से आप करीब आये हैं
ख्वाबों खयालों अरमानों में बस तुम ही तुम बसती हो 
हां, ये सच है कि पल पल दिल के पास तुम रहती हो 

हरिशंकर गोयल "हरि"