खूबसूरत सा रंग महल है जिंदगी जिसमें अनेकों रंग सजते है,
खिड़की,रोशनदान, और  झरोखों से प्यार के फूल खिलते है,
जहाँ दिल में बसी हो प्रेम और सौहार्द की वो अनुपम  सी भावना,
दौलत से नही जहाँ पर रिश्ते सिर्फ प्रेम और एहसास से चमकते हो।

रिश्तों की ये बेसुमार इमारत सच्चाई पर टिकी होती है,
प्यार, ईमानदारी  और भरोसे  की छत  बनी  होती है,
बन जाते है जिंदगी में रिश्ते एक खूबसूरत सा एहसास,
जिन रिश्तों में दिलों से एक दूसरे की सलामती होती है।

कई नाम होते है रिश्तों के अनजान को भी अपना बना लेते है,
होते है इंसानियत की पहिचान और खुदा की नेमत  होते है,
सिर्फ  खून  के रिश्ते  ही  मायने  नहीं  रखते  जिंदगी  में
कभी-कभी  इंसानियत  के  रिश्ते  भी  संजोए  जाते  है।

शीला द्विवेदी "अक्षरा"
उत्तर प्रदेश "उरई"