थे अँधेरे रास्ते वो थे हमारे वास्ते
चले थे दोनो एक साथ
ना थे उम्र के भी फासले
एक एक पल था बहुत रूमानी
जिसमें जिक्र था बस इश्क का रूहानी
बातों ही बातों में करीब आ रहे थे
हम दोनों प्यार की बरसात में नहा रहे थे
वो चाहते थे जाना छोड़ उस अँधेरी रात में
हमने भी जताया हक कहा ना जाओ इस अँधेरी रात में
आज की इस रात को यादगार बनाना है
आज हम दोनों ने बस इश्क़ में नहाना है
लिया एक कप चाय का प्याला उसने अपने हाथ में
घुल गया हवा में इश्क़ उनके रूहानी साथ में
एक एक पल में हमने सदियाँ थी गुजारी
लग रहा था ऐसा जैसे जान जाएगी हमारी
कुछ इस तरह से हमने खुद को सौंपा था उन्हें
जैसे जून की गर्म धरती को भिगोए बरसात की बूँदें
बस ठान लिया था ये रिश्ता उम्र भर निभाएंगे
ना कभी मझधार में उनको छोड़ कर जाएँगे
तभी रूहानी इश्क़ ने की बात उस अजनबी की
बताया प्यार नही सब है उसके लिए दिल्लगी
एक एक मोहरे का था नाम बताया
मेरे दिल पे उसने था एक बाण चलाया
हम तो बस खामोश से होकर ही रह गए
वो ना जाने कितने राज हमको बता गए
जो हमने समझा था कि ये इश्क़ था रूहानी
वो तो बस एक रात की थी सारी कहानी
उस एक मुलाकात ने था हमको रुलाया
नही रूहानी इश्क़ ये था हमको समझाया
अब चाहे उम्र हो मेरी कितनी भी कभी
लेकिन वो मुलाकात याद हमेशा आएगी
💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕

0 टिप्पणियाँ