जानती हूँ मुमकिन नहीं तुम्हे पाना
फिर भी मिलने की दुवाए करती हूँ
होगए तुम गैरों के मेहमान दिल का
फिर भी मैं तुमसे ही प्यार करती हूँ
यूँ जाना तेरा मंज़ूर नहीं था तुम्हे भी
मेरी तरह बहुत तड़प सहा है तुमने भी
जानती हूँ मुश्किल है तुम्हे एक वादा भी निभाना
फिर भी दिल से तुम पे मैं ऐतबार करती हूँ
कोई ख्वाहिश नहीं इस दिल में सनम तेरे सिवा
नींदो में अब भी तुम्हारे सपने संजोया करती हूँ
कोसते है तारे भी आसमान की मुझे कभी कभी
फिर भी प्यार की सपने तुम्हारे लिए ही सजाति हूँ
दिल के कोने से हर पल आवाज़ आती रहती है
तुम आओगे एक दिन मिलने मेरी साँसे कहती है
उन्ही अहसासों को जीने की वजह बनाने के लिए
अपनी हर सांस पर तेरा ही नाम लिखा करती हूँ
यूँही बेवजह नहीं है अब तक सनम जिना मेरा
कुछ तो अहसास अभी भी है मेरे प्यार की दिल में तेरा
पढ़ लोगे कभी मुझे सनम नैना की लिखें अफसानो में
इसीलिए तुम्हारे नाम अपनी हर अल्फाज़ लिखती हूँ....!!
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नैना..... ✍️✍️💓

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