सही मायने में लौहपुरूष थे।
भारत के सच्चे भद्रपुरूष थे।
एकीकरण करने वाले कर्मठ पुरूष थे।
भारत के रक्षक जुझारू पुरूष थे।

फौलादी,भरकम था देह विशाल।
इरादे भी फौलादी विकराल।
जब संप्रदायिक दंगों का था बुरा काल।
तब दिखाया पटेल ने सच्ची चाल।

देश मानें इनका एहसान।
फिर लौटे ऐसा है अरमान।
सम्हाले देश की कमान।
बना रहे देश का सम्मान।

                  -चेतना सिंह