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बाप रोजे रखता है, बेटा होटल में जाता है।य
माँ से वह बोल देता है, फालतू बात नहीं।।
मुफ्त की वह खाता है, पसीना बाप बहाता है।
घर की गरीबी दिखाये तो, फालतू बात नहीं।।
बाप रोजे रखता है-----------------।।



काम दो नम्बरी करता है, कहता है फिर भी ईमान।
बर्बाद औरों को करने में, समझता है अपनी शान।।
सच क्या है बताये तो, फालतू बात नहीं।
बाप रोजे रखता है------------------।।



मिली है आजादी कैसी,किसने दी है कुर्बानी।
जुल्म किसने सहे थे,याद नहीं उसको कहानी।।
तस्वीर उनकी दिखाये तो, फालतू बात नहीं।
बाप रोजे रखता है---------------।।



रोज महफिल जमती है, सजती है सेज फूलों की।
घर को कहता है जहन्नुम ,प्यास है उसकी हूरों की।।
इज्जत की बात बताये तो , फालतू बात नहीं।
बाप रोजे रखता है--------------------।।




रचनाकार एवं लेखक- गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
जिला- बारां(राजस्थान)