सत्यम तीन बहनों में सबसे छोटा था बहनों सुचित्रा ,ऋतु,सारिका का विवाह हो चुका था पिता शिव चरण बिजली विभाग में बाबू पद से सेवा निबृत्त हो चुके थे सत्यम रेलवे में बाबू की नौकरी करता था ।नौकरी मिलने के बाद उसके शादी के लिये रोज कोई ना कोई आता मगर कही भी रिश्ता पक्का नही हो पाता कहीं लड़की ठीक नही मिलती तो कही परिवार इसी तरह अनिश्चित स्थिति के कारण सत्यम की शादी तय नही हो पा रही थी ।सत्यम की माँ ज्योत्स्ना ने बड़ी बहन महिमा से कहा कि सत्यम के लिये कोई अच्छा रिश्ता बताएं महिमा ने तुरंत ही सत्यम के रिश्ते के लिए अपने पड़ोसी मुल्क राज जी की बेटी तान्या के रिश्ते की बात ज्योत्स्ना को बताई और मुल्क राज को अगले दिन रिश्ते का प्रस्ताव जाने की बात बताई मुल्क राज एक साधरण से व्यवसायी थे उनके पांच बेटियां और दो बेटे थे बेटे अभी पढ़ रहे थे पांच बेटियों में तीन का विवाह हो चुका था तान्या चौथी बेटी थी बेहद खूबसूरत पढ़ी लिखी मिलनसार एव शौम्य थी आज जब बेटियां पढ़ लिख कर देश समाज के हर क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रही है नारी बेटियों के प्रगति विकासोन्मुख देश काल समाज मे तान्या अति विशिष्ट लड़की थी ।मुल्क राज दूसरे दिन ठीक दस बजे शिव चरण के घर अपनी बेटी तांन्या का रिश्ता लेकर पहुंचे ज्योत्स्ना जैसे मुल्कराज का इंतज़ार ही कर रही थी मुल्कराज के पहुचते ही ज्योत्स्ना ने मुल्क राज का परिचय अपने पति शिव चरण से करवाते हुए बताया कि मुल्क राज जी मेरी सहेली महिमा के पड़ोसी है और अपनी बेटी तांन्या का रिश्ता लेकर आये है शिवचरण ने मुल्कराज जी का बड़ी गर्म जोशी से स्वागत किया ससम्मान ड्राईंग रुम में बैठाया ज्योत्स्ना मेहमान के लिये नाश्ता लेने अंदर चली गयी ।मुल्कराज ने शिव चरण जी से बहुत स्प्ष्ट शब्दो मे कहा शिवचरण जी शादी की बात हम तब करेंगे जब आप और ज्योत्स्ना जी बिटिया तांन्या को देखकर रिश्ते के स्वीकार करेंगे शिवचरण ने कहा मुल्कराज जी यह तो बहुत अच्छी बात है आप तो इंतेहा खूबसूरत नेक नियत इंसान है ।कल ही हम लोग तांन्या को देखने आएंगे तब तक ज्योत्स्ना चाय आदि लेकर ड्राईंग रूम में दाखिल हुई बोली क्या हुआ कुछ बात भी हुई कि एक दूसरे का इंतज़ार ही हो रहा है कि बात चीत की कौन पहले पहल करेगा शिवचरण जी बोले अरे भाग्यवान मुल्कराज जी तो बहुत नेक नियत इंसान है इन्होने पहले ही बोल दिया कि पहले हम लोग तांन्या को देखकर नीर्णय कर ले तब विवाह के लिये बात चीत होगी भाई हमे तो मुल्कराज जी की बात पसंद आई कल सुबह हम लोग तांन्या से मिलने मुल्कराज जी के घर जा रहे है वही सभी बिषयो की रूपरेखा बना लेंगे।मुल्कराज लौट चुके थे दूसरे दिन सुबह दस बजे शिवचरण एव ज्योत्सना सीधे मुल्कराज जी के घर पहुंच गए मुल्कराज जी ने बड़े गर्मजोशी दोनों का स्वागत करने के बाद इज़्ज़त के साथ बैठाया नास्ता आदि कराने के बाद पत्नी लता से बोले अरे भाग्यवान तांन्या बिटिया को भी बुलाओ नए अंकल से परिचित करवा देते है लता ने बिना किसी साज मेकअप के तांन्या जैसे घर मे रहती थी उसी स्थिति में साथ लेकर ड्राईंग रूम में दाखिल हुई शिवचरण और ज्योत्स्ना के आश्चर्य का ठिकाना नही रहा एक टक तांन्या को ही देखते रह गए मुल्कराज ने कहा आप लोग कहां खो गए यही है तांन्या जिसके रिश्ते की बात लेकर कल आपके पास गया था शिवचरण और ज्योत्स्ना ने एक साथ बोला मुल्कराज जी हम दोनों की सहमति है कि तांन्या हमारे घर की बहू बने।।शिवचरण और ज्योत्स्ना की सहमति सत्यम की सहमति थी फिर भी मुल्कराज ने शिवचरण और ज्योत्स्ना से पूछ ही लिया की सत्यम यदि तांन्या को देखना चाहे तो उसकी भी संतुष्टि हो जाती । शिवचरण ज्योत्स्ना ने मुल्कराज जी को आश्वस्त किया कि सत्यम को तांन्या को देखने की कोई जरूरत नही है क्योंकि सत्यम को भी पता चलना चाहिये कि उसके माँ बाप ने उसके लिये चाँद को जमीं पर उतार कर लाये है तब तक सस्पेंस बना रहना चाहिये फिर मुल्कराज लता एव शिवचरण ज्योत्स्ना जी बैठकर विवाह के रस्म रिवाज परम्परा के विषय एव उसके सम्पादन निष्पादन पर विधिवत चर्चा किया और पण्डित को बुलाकर कर शादी का मुहूर्त निकलवाया हर तरह से निश्चिंत होकर जब शिवचरण और ज्योत्स्ना मुल्कराज जी से जाने की इजाज़त मांगने लगे तब मुल्कराज बोले शिवचरण से बोले भाई साहब मेरी पांच बेटियाँ है तांन्या चौथे नम्बर पर है मेरे दोनों बेटे अभी उच्च शिक्षा में अध्ययनरत है जिनका बोझ भी मेरे ऊपर है मैं बहुत सामान्य व्यवसायी हूँ विवाह में जो कुछ सेवा स्वागत में बन पड़ेगा कोई कोर कसर नही उठा रखूँगा अब आप बताइए कि दहेज में आपको सत्यम को क्या चाहिये यदि मैं सक्षम रहूंगा तो अवश्य करुंगा शिवचरण ने कहा मुल्कराज जी इतनी गुणशील सुंदर सांस्कारो से परिपूर्ण कन्या जिसे आपने बड़े प्यार से परिवरिश दिया है हमारे घर की लक्ष्मी मुझे देने को संकल्पित है और क्या चाहिये आप एक जोड़े कपड़े में तांन्या की बिदाई मेरे घर कीजिये ।।इतना कहते हुये ज्योत्स्ना मुल्कराज जी से इज़ाज़त लेकर चले गए और घर पहुंचकर शादी की तैयारी करने लगे इधर मुल्कराज जी भी शादी की तैयारियों में जुट गए एक माह बाद विवाह के शुभ मुहूर्त पर सत्यम और तांन्या परिणय सूत्र में बध गये सत्यम तो गुणवान और सुंदर तांन्या को पाकर अपनी किस्मत पर फुला नही समा रहा था ईश्वर एव पापा मम्मी का आभारी एव कृतज्ञ था। सत्यम बहुत खुश था और तांन्या भी सत्यम जैसे सुशील विनम्र और केयरिंग हसबैंड को पाकर बेहद खुश थी और ईश्वर का बार बार धन्यवाद देती शिवचरण और ज्योत्स्ना भी बेहद खुश थे तांन्या को बहु के रूप में पाकर कुल मिलाकर परिवार खुशहाल और अपनी किस्मत पर भगवान की मेहरबानी के लिये भगवान का कृतज्ञ था ।। धीरे धीरे कैसे पांच साल बीत गए पता ही नही चला लेकिन सत्यम तांन्या को कोई औलाद नही हुई शिवचरण और ज्योत्स्ना को चिंता होने लगी एक दिन शिवचरण एव ज्योत्स्ना ने बुलाकर सत्यम और तांन्या से कहा बेटे तुम्हारी शादी के पांच वर्ष से अधिक का समय हो चुका है और घर मे बच्चे की नन्ही किलकारी नही गूंजी यदि कोईदिक्कत हो तो किसी गाइनिकॉलजिस्ट से तांन्या को दिखाओ सलाह लो और तुम स्वयं भी किसी डॉक्टर से सलाह लो माँ बाप की नसीहत काबिले गौर और सच्चाई थी अतः दूसरे दिन ही तांन्या और सत्यम ने अपनी अपनी जांच कराई एक दिन बाद सारे रिपोर्ट आ गये डॉक्टरों ने सलाह दिया कि दोनों का माइनर ऑपरेशन होगा उसके बाद कुछ सम्भव हो सकेगा तांन्या और सत्यम का ऑपरेशन हुआ लगभग तीन माह में चिकित्सकों ने दोनों को फर्टिलिटी साउंड और स्वस्थ की दृष्टिकोण से स्वस्थ घोषित कर दिया ।।जिंदगी और समय दोनों ही अपने अपने अनुसार चलने लगी एक वर्ष बाद तांन्या ने बेहद खूबसूरत कन्या को जन्म दिया शिवचरण ज्योत्स्ना को जैसे मनचाही मुराद मील गयी घर मे चौतरफा खुशियों का माहौल था बढ़े प्यार से परिजनों ने नए मेहमान का नाम वोल्गा रखा वोल्गा बिलकुल अपनी माँ की फ़ोटो कॉपी थी उसके पैदा होने के बाद ही सत्यम को विभाग में पदोन्नति मिली तांन्या को भी आयकर विभाग में क्लर्क की नौकरी मिल गयी सत्यम और तांन्या दिन में अपने अपने ड्यूटी पर चले जाते पूरे दिन वोल्गा दादी दादा के पास रहती शिवचरण और ज्योत्स्ना को पता ही नही चलता दिन कैसे बीत जाता पूरे दिन वोल्गा की शरारते उसकी जिद बहुत अच्छी लगती और उसे पूरा भी करते और दिन कैसे बीत धीरे धीरे वोलग्स पांच वर्ष की हो गयी उसके छठे जन्म दिन को बहुत धूमधाम से परिवार ने अपने रिश्तेदारों मित्रो पड़ोसियों के साथ मनाया जन्म दिन का उत्सव के समाप्ति के एक सप्ताह बाद वोल्गा को तेज बुखार आने लगा शुरू में तो शिवचरण ज्योत्स्ना सत्यम एव तांन्या ने समझा कि साधारण सा बुखार होगा और ठीक हो जाएगा लेकिन लागातार एक माह तक अच्छे से अच्छे डॉक्टर को दिखाने के बाद भी वोल्गा का बुखार उतरने का नाम नही ले रहा था डॉक्टरों ने सर्व सम्मति से वोल्गा को उच्च चिकित्सा संस्थान में दिखाने की सलाह दी शिवचरण सत्यम ज्योत्स्ना तांन्या वोल्गा को लेकर अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान दिल्ली गए जहाँ डॉक्टरों ने वोलग्स की जांच लगभग एक माह तक हर मापदंड संभावनाओं पर कराई और विचार किया और निष्कर्ष पर पहुंचे की वोल्गा क्रोनिकल रिकेमिया की मरीज है और इसका इलाज सिर्फ मैरो ट्रांसप्लांट ही है जो भारत मे सम्भव नही है और सारे तथ्य से वोल्गा के परिजनों को अवगत करा दिया।। शिवचरण ज्योत्स्ना सत्यम तांन्या पर तो जैसे बज्रपात हो गया उनके समझ मे नही आ रहा था कि क्या करे जिससे वोल्गा को बचाया जाए शिवचरण ने डॉक्टरो से इलाज के लिये पूरी जानकारी हासिल की डॉक्टरों ने बताया कि मैरो ट्रांसप्लांट ब्रिटेन या अमेरिका में ही होते है जिसके लिये चालीस पचास लाख रुपये का खर्च और लगभग छ माह अमेरिका या इंग्लैंड रुकने का खर्च कुल खर्च लगभग दो करोड़ रुपये होगा साथ ही साथ मैचिंग मैरो डोनर की आवश्यकता होगी उसके बाद साल में एक बार रूटीन चेकअप के लिये जाना होगा और पूरी जिंदगी कुछ दवाएं चलेंगी शिवचरण और ज्योत्स्ना और सत्यम पर जैसे आफत का पहाड़ ही टूट पड़ा साथ मे मुल्कराज और लता भी थे सभी इस चिंता में पड़ गए कि यदि एक बार पैसे की व्यवस्था कर भी लिया जाय तो डोनर और प्रत्येक वर्ष रूटीन चेकअप क्या सम्भव हो पाएगा ।।चारो तरफ अंधेरा ही अंधेरा किसी को कुछ भी नही सूझ रहा था तांन्या ने सत्यम से कहा जाने दीजिये समझ लीजिये वोल्गा हम लोंगो के जीवन मे किसी परी की तरह इतने ही दिनों के लिये आयी थी शिवचरण ने कड़े शब्दों में तांन्या से कहा कैसी मां हो एक औरत होकर भी एक बेटी जो कल की औरत नारी होगी के दर्द पीड़ा के निराकरण के विषय मे कोई ठोस उपाय करने के वजाय भाग्य भगवान को दोष दे रही हो हिम्मत हारने की जरूरत नही है तांन्या ने अपने श्वसुर के कड़े शब्द सुनकर बोली बाबूजी हम तो सिर्फ परेशानियों और खर्च के बाबत कह रहे थे फिर जीवन भर बोल्गा को लेकर चिंतित रहना होगा मेरी इतनी सुंदर बेटी है मैं तो चाहूंगी कि यह दीर्घायु स्वस्थ रहे ।।शिवचरण जी डॉक्टर मौलिक खुराना जो जांच टीम के मुखिया थे से संपर्क कर सारी प्रक्रियाओं की जानकारियां हासिल की और उनका सहयोग मांगा डॉक्टर मौलिक खुराना ने इलाज हेतु आकस्मिक स्वस्थ पासपोर्ट एव बीजा की औपचारिकता पूर्ण करके भारत सरकार से वित्तीय सहायता सम्बंधित सिफारिश की चूंकि इंदौर शहर में सभी नागरिक सुविधाओं के सर्वोच्च स्तर कार्यालय और प्रणालियां है अतः लगभग एक माह में सभी कागजात तैयार हो गए ।।सभी औपचारिकता पूर्ण होने के बाद शिवचरण सत्यम ज्योत्स्ना लता और तांन्या पुनः दिल्ली अखिलभारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान गए और डॉ मौलिक खुराना से मिले डा मौलिक खुराना ने जो भी सम्भव सहायता थी करने की कोशिश किया और इंग्लैंड में अपने मित्र डा विलियम हिक से फोन करके वोल्गा की स्तिथि की पूरी जानकारी दी और हर संभव मदद के लिये निवेदन किया और डॉ विलियम हिग को एक पत्र लिखकर शिवचरण को दिया और बोले आप लोग निश्चित होकर जाए ईश्वर जो भी करेगा बहुत अच्छा करेगा ।।शिवचरण, सत्यम ,लता ,मुल्कराज और ज्योत्स्ना अखिलभारतीय आयुर्विज्ञान संथान से बाहर निकले सत्यम बैंक जाकर रुपये को पाउंड में कन्वर्ट कराया और अगले दिन सुबह पांच बजे की फ्लाइट से इंग्लैंड के लिये सत्यम तांन्या और शिवचरण जी रवाना हो गए आठ घण्टे के हवाई सफर के बाद इंग्लैंड पहुंच गए एक दिन आराम करने के बाद दूसरे दिन डॉ विलियम हिक से मिले विलियम हिक को डॉ मौलिक खुराना का पत्र दिया डा विलियम हिक ने बिना बिलम्ब वोल्गा की सारी जांच शुरू कराई और अस्पताल में भर्ती करा दिया और मरीज एव उसके साथ आये सभी व्यक्तियों का विवरण भारतीय दूतावास को प्रेषित कर दिया लगभग पंद्रह दिनों के गहन जांच के बाद सभी जांच रिपोर्ट डॉ विलियम के पास आ गयी अब मैरो ट्रांसप्लांट की प्रक्रिय शुरू की गई लेकिन समस्या यह थी कि वोल्गा का ब्लड ग्रुप बी निगेटिव था जिससे मैच मैरो मिलना बहुत कठिन था डॉ विलियम हिक ने इंग्लैंड के मीडिया में अखबार में एक इस्तेहार दिया इस्तेहार कुछ इस तरह का था इंग्लैंड में "एक नन्ही परी जीवन के इंतजार में और साथ मे वोल्गा की खूबसूरत तस्वीर " इस इस्तेहार ने पूरे इंग्लैंड वासियों को भावनात्मक रुप से झकझोर दिया बहुत से इंग्लैंड वासियों ने मैरो डोनेट करने की पेशकश की मगर कोई ना कोई समस्या आ जाती अंत मे स्टीफेन क्लार्क जो इंग्लैंड के उद्योगपति थे अपने दस वर्षीय बेटे जार्ज को वोल्गा को मैरो डोनेट करने के लिये प्रस्तावित किया जिसे डॉ विलियम की पूरी टीम ने बेहद सावधानी से परीक्षण किया और सर्वोत्तम मैच मानते हुये मैरो ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरु कर दिया और मैरो ट्रांसप्लांट सफलता पूर्वक हो गया लगभग एक माह बाद वोल्गा के स्वस्थ में सुधार होने लगा और छः माह में वह सामान्य होंने लगी ।।वोल्गा के स्वस्थ होने के बाद स्टीफेन क्लार्क ने एक अजीब सा प्रस्ताव तांन्या सत्यम और शिवचरण के समक्ष रखा उन्होंने कहा कि आप लोग वर्ष में एक बार वोल्गा को लेकर चेकअप कराने आएंगे यह प्रक्रिया बहुत दिनों तक चल सकती है और सम्भव हैं कि बीच मे भी कोई समस्या आ जाये और बीच मे भी आना पड़ सकता है मैँ यह नही कहने जा रहा हूँ कि आप लोग अपनी चहेती को प्यार परिवरिश नही दे रहे है मैँ जानता हूँ कि आप लोग कितनी परेशानियों के बाद वोल्गा का इलाज यहाँ कराने आये आप लोग जैसे माता पिता और दादा बिरले बच्चों को नसीब होते है ।।दरसल मेरा बेटा जार्ज ने जिद कर लिया है कि वोल्गा हम लोंगो के साथ रहेगी और साथ ही पढ़ेगी मैंने अपने बेटे जार्ज को समझाने की बहुत कोशिश किया कि वोल्गा के मम डैड इसे तुम्हारे द्वारा दिये गए मैरो डोनेशन एहसान की कीमत मानेंगे लेकिन वह नही माना यदि मेरी बात पर यकीन ना हों तो आप मेरे घर चले और जार्ज की दशा देंखे और फिर जो निर्णय लेना हो ले।। मेरे पास धन दौलत रुतबा किसी चीज की कोई कमी नही है ना ही औलाद की मगर औलाद की जिद ने मुझे बेवस कर दिया है आप लोग मेरे साथ चलिये स्टीफेन क्लार्क अपने साथ शिवचरण ,तांन्या ,सत्यम और वोल्गा को लेकर स्मिथ स्ट्रीट मैनचेस्टर पहुंचे वहाँ पँहुचते ही सत्यम शिवचरण और तांन्या जार्ज की स्तिति देखकर स्तब्ध रह गए जार्ज ने खाना पीना छोड़ विस्तर पर पड़ा है जब उसने वोल्गा को देखा तो खुशी से उछल पड़ा और सत्यम शिवचरण एव तांन्या को थैंक थैंक कहते हुये लिपट गया ।।सत्यम शिवचरण और तांन्या ने स्वय महीनों जार्ज को समझने समझाने की कोशिश करते रहे और जितने भी संभव तरीके थे सभी को आजमाया लेकिन जार्ज की नाजुक भावनाओं को बहलाने का कोई नुख्सा काम नही आया ।।अंत मे शिवचरण सत्यम वोल्गा को इंग्लैंड में स्टीफेन क्लार्क के संरक्षण में छोड़ने का फैसला कर लिया और सीधे स्टीफेन क्लार्क के साथ डा विलियम हिक के पास फहुँचे और सारी बाते बताई डॉ हिक ने कहा आप लोग कानूनी प्रक्रिया पूर्णकरवाने के बाद जो वोल्गा के बाबत आपकी शर्तो पर होगा पूर्ण करने के उपरांत वोल्गा को छोड़े शिवचरण ,सत्यम को बात अच्छी लगी स्टीफेन क्लर्क को कोई आपत्ति नही थी सत्यम, शिवचरण एव तांन्या ने जो भी चाहा वह नियम कानूनी प्रक्रिया के क्लाज़ के रूप में सम्मिलित किया गया हर तरह से संतुष्ट होने के बाद सत्यम तांन्या और शिवचरण ने वोल्गा को स्टीफेन क्लार्क के संरक्षण में छोड़ने के बाद भारत लौट आये लौट आये और ज्योत्स्ना मुल्कराज लता से सारी जानकारियां साझा किया सभी ने तांन्या को स्टीफेन क्लार्क के संरक्षण में छोड़ने के फैसले का समर्थन किया इंग्लैंड में स्टीफेन क्लार्क के परिवार में जार्ज और वोल्गा एव सोनिया स्टीफेन जार्ज की पत्नी एव जार्ज की माँ चार लोंगो की का परिवार दुनियां का सबसे खुशहाल परिवार था स्टीफेन क्लार्क वर्ष में एक बार पूरे परिवार के साथ इंदौर आते और एक महीने शिवचरण, सत्यम ,तांन्या ,लता, मुल्कराज के साथ गुजारते और लौट जाते स्टीफेन क्लार्क ने वोल्गा को सभी भारतीय सांस्कारो से सुसज्जित किया कभी भी उन्होंने वोल्गा पर क्रिश्चियन मान्यताओं परम्परा को नही थोपा धीरे धीरे वोल्गा की आयु पच्चीस वर्ष हो गयी और वह स्वयं भी चिकित्सा के क्षेत्र की मशहूर हस्ती बन चुकी थी और जार्ज नासा का मशहूर बैज्ञानिक हो चुका था सत्यम और तांन्या को वोल्गा के बाद दो बेटे निर्माण और विकास पैदा हुये निर्माण स्वय इंग्लैंड में चिकित्सक था अब भाई निर्माण के इंग्लैंड आने के बाद वोल्गा दो भाईयो की लाड़िली तो थी ही दो देशों का भी अभिमान थी।।
कहानीकार --नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश

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