चंचल है मन बात न माने करता है मनमानी। 
समझाया मत कर मनमोहन से यारी।। 
छलिया मन चोरी कर लैहै मत कर मनमानी। 
दिन औ रात नींद नहीं आबे अँखियाँ  करें बेईमानी ।।
मन भरमावे मन ललचावे करत रहे नादानी। 
मोहन हैं चितचोर सदा के करत रहत मनमानी।। 
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉक्टर आशा श्रीवास्तव