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बनकै परवाना पंछी,उड़ गया आँचल से।
करके मुहब्बत गुल से, रुखसत है बेटा माँ से।।
अश्क बहाये माता रोज पुकारे, आजा लाल मेरे ।
आजा लाल मेरे-----------------।।


किसने दिखाई तुझको, मंजिल तकदीर की।
भूल गया तु ममता, माँ की तस्वीर की ।।
दीपक जलाये माता, श्याम को पुकारे।
आजा लाल मेरे----------------।।


जन्म दिया है तुझको, चलना सिखाया।
कांटों में रहकर तुझको, राजा बनाया।।
राह निहारे माता, राम को पुकारे ।
आजा लाल मेरे--------------।।


घर के दरवाजे पर , खड़ी है तेरी बहिना।
राखी के दिन रुसवां है, भाई उसका अपना।।
राखी को देखे , बहिना भाई को पुकारे। 
आजा लाल मेरे-----------------।।


प्रीत यह दिल की , तुझको किसने सिखाई।
तोड़कर दिल अपनों का , तुने की बेवफाई।।
श्रवण को तरसे माता, आस लगाये रे। 
आजा लाल मेरे---------------।।






रचनाकार एवं लेखक- 
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद