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जबसे इन सर्दियों की मौसम आया है
साथ मे दिलकश यादों की बारात लेकर आया है
वो गुज़रे हुए बचपन की कुछ यादें हँसी
मेरे होठों पर फिर से सच्ची मुश्कान लेकर आया है

कितना हँसीन था वो लम्हा अपनेपन का
भर आता है दिल ज़ब भी यादें दिल से टकराता है
जाने कहाँ खोगयी किस ज़माने से गुज़रे हम
की लौट कर ऊन दिनों मे कभी कोई जा नहीं पाता है

काश अब भी राते सोती हमारी दादी की मीठी लोरी से
दिन शुरू करते थे जो माँ की मीठी आरती की धुन से
दिन गुज़ार पाते हम खेल और मस्ती मे जिसके याद 
हमारी होठों पर फिर से सच्ची मुश्कान बिखेर जाता है

वो पापा के साथ हर सुबह टहलने जाना दूर तक
वो ओस से भीगी सड़के आज भी हमें सुकून दें जाती है
अब भी पूछती है वो गालिया उन बीते बचपन की बारे मे
तो कसम से इन आँखों से यादो की दरिया बह जाता है

कितना खास अहसास होता है ज़िन्दगी मे बचपन का
भूल जाते है हर गम जो दिल मे हँसी यादों के कमरे खुल जाते है
लगता नहीं है कभी की सदिया बीत गयीं देखते देखते
इतने खोजाते है ऊन यादों मे जैसे बात वो कल का ही है

मौसम को बदलना ही है वो तो हर हाल मे बदलेगा
पर हमारे ज़िन्दगी मे यादें कयी अपना निंशा छोड़ जाता है
समेट ले नैना इन अहसासों को अपने दिल के धड़कन मे
देख इन यादों की बारात मे तेरे अपनों की दुआ भी साथ लाया है....!!
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नैना.... ✍️✍️