याद अब भी आता है मुझे
 वें  बूढ़े  बरगद  का  पेड़ 
 बड़ी   और    अंडाकार 
चमकदार और हरे रंग की
उनकी     पत्तियां    रोज 
मेरे  मन को लुभाती थी । 

उनकी बड़ी-बड़ी शाखाओं पर 
चढ़कर खेलना हमे भाता  था 
छुप्पन   छुपाई    के   खेल में 
हमें    अपने    में      छुपाकर 
वह   संग  हमारे   खेलते  थे ।

स्कूल  जाने   के  समय  हमें 
वें   बाय   भी  तो करते  थे 
स्कूल   से  लौटते  वक्त   जब 
हमारी नजर उन पर पड़ती थी 
अपनी  पत्तियों  को   हिलाकर 
हमें   अपने   पास   आने   के 
इशारे   किया   करते    थे । 

बूढ़ा    हो   गए   थे    फिर    भी 
प्रकृति      के     थपेड़े     सहकर 
दुबारा से फलने - फूलने लगते थे 
हम    उसकी   छांव   में     बैठकर 
भविष्य    के    सपने   संजोते   थे 
हमारे सुख - दुख के वें  साथी  थे 
बूढ़े    बाबा    कहकर   हम   सभी 
उसे      संबोधित      करते       थे । 

बहुत रोएं थें उस दिन हम सभी  दोस्त 
जिस        दिन         सुबह      उन्होंने
हमें     बाय    तो  किया   था   लेकिन 
लौटते  वक्त   वह  हमें  नहीं   दिखें  थे 
दौड़ कर हम बूढ़े बाबा के घर में  गए थे 
चारों       तरफ        उनकी     शाखाएं 
बेतरतीब   यहां - वहां     पड़ी        थी । 


हरी - हरी चमकदार और अंडाकार  पत्तियां 
जमीन      पर    ही    टूटकर     गिरी    थी 
बूढ़े    बाबा   की    ऐसी   हालत    देखकर 
हम  दोस्तों   की  ऑंखें  ऑंसूओं से भरी थी 
हमने      चीख - चीखकर     सबसे       पूछा 
किसने हमारे बूढ़े बाबा की यह हालत करी थी ? 

ऑंखों   को   विश्वास   नहीं   हो   रहा  था 
जिसने हमारे बूढ़े बाबा को हमसे छीना था 
वें   कोई   गैर    नहीं बल्कि  हमारे अपने थें 
अपना       घर       बनाने     की      खातिर 
हमारे       अपनों       ने        ही        हमसे 
हमारे    बूढ़े    बाबा   को  छीन  लिया   था ।

  दिल   आज   भी   उन  अपनों  को 
 माफ़     नहीं     कर      पाया      है 
  उन्होंने   लाख   समझाया     लेकिन 
 मैंने   आज  तक   कदम   नहीं   रखा 
 जहां हमारे बूढ़े बाबा का कत्ल हुआ था । 


माफ़ी      ही    सबसे    बड़ी   सजा    है 
हम   पेड़ों   की तरह माफ़  करना  सीखों 
बूढ़े बाबा सपने में आकर रोज ही  कहते हैं 
कैसे       माफ़        कर      दूं        उन्हें 
मेरे अंदर भी तो उन्हीं इंसानों का खून हैं 
जों    निर्दोषों    का    खून    करते    हैं ।

   
                                       धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻

" गुॅंजन कमल " 💗💞💓