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इंसाफ का तराजू कह रहा,मानव का पलड़ा भारी है,
बदल रहा इंसान यहां अब,उठती कैसी चिंगारी है,
पशु बना है बलि का बकरा अहम की आंधी जारी है,
मासूम पशु पक्षियों की क्यों गर्दन पर चलती आरी है,
कभी धर्म के नाम पर मौत को गले लगाया है,
इन मासूम पशुओं में जीवन अपना गांवाया है,
सर्वश्रेष्ठ योनि का मानव बन बैठा अत्याचारी है,
कर् मास मदिरा का सेवन बर्बादी की तैयारी है,
बदल रहा इंसान यहां अब, कैसी उठती चिंगारी है,
सोच रहा मासूम पशु,क्यों मानव का पलड़ा भारी है
संगीता वर्मा ✍️✍️

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