ईश्वर ने बुद्धि और विवेक देकर हमें धरती पर भेजा है ,हम  बड़े बड़े जीवों को अपनी बुद्धि के बल पर उंगलियों पर नचा सकते हैं,तो क्या हमें उन पर क्रूरता करने का अधिकार मिल जाता है।
दो साल पहले प्रिशा अपने पांच साल के  बेटे को लेकर गांव गई ।पति फौज में थे, तो वह उनके साथ साथ पोस्टिंग पर जाती थी । इस कारण  रिश्तेदारों से भी मिलना कभी कभार ही हो पाता था । मां ,पिताजी बुला बुला कर थक गए थे,  इस बार उसकी बहन की  शादी थी जिसमें उसका शामिल होना बहुत जरूरी था,इसलिए पति ने उसे 1 महीने पहले भेज दिया ताकि वह बहन की शॉपिंग में मदद कर सके और मां ,और पिता जी की शिकायत दूर कर सके।
प्रिशा का बेटा पहली बार गांव आया था ,उसे बहुत अच्छा लग रहा था,खेत,खलिहान,मवेशी,घर में गाय ,भैंस पली थीं।

शुद्ध दूध रेयांश को मिलता था,ये सब शहरों में कहां मयस्सर।
एक दिन रात में खबर आई कि एक पशु इलेक्ट्रिक तार की चपेट में आकर मर गया।
सुबह गांव वालों ने देखा , कि नीलगाय खेत में लगाए गए फेंसिंग की चपेट में आकर मर गई।रात में उसमें बिजली दौड़ा दी जाती थी ।
नन्हा रेयाँश प्रिशा से लिपट खूब रोया ।

उसी दिन रात को टीवी पर केरल के मल्लपुरम से एक खबर आई ,एक गर्भिणी हथिनी को किसी ने अन्नानास जिसके अंदर क्रूड बम  था खिला दिया।
ये मानवता को शर्मसार करने वाली खबर थी ।कितने क्रूर हैं हम ,इससे यही साबित होता है।
बेचारी गर्भिणी हथिनी ने अपने गर्भ में पल रहे बच्चे सहित तड़प तड़प कर ,3 दिन के संघर्ष के बाद दम तोड दिया।
रेयांश  को प्रिशा टीवी चैनल पर यह खबर जब आ रही थी तो ,लेकर दूसरे कमरे में चली गई थी।फिर भी नन्हे रेयांश ने सब कुछ सुन लिया था।
सुबह जब वह नाना के साथ खेत जा रहा था तो उसके दिमाग में बहुत सवाल थे।
क्योंकि मम्मी ने बताया था कि नाना जंगल में जानवरों के साथ रहते थे ,असल में प्रिशा ने बताया था कि नाना फॉरेस्ट ऑफिसर थे उन लोगों को पकड़ते थे जो जानवरों का शिकार करते थे,इसलिए रेयांस नाना से पूछने लगा ,_नाना आप बताओ ,क्या हाथी को मारने वालों को पकड़ा नहीं जाएगा?
नाना ने कहा _मेरे बच्चे उन्हें पकड़ा जाएगा,हाथियों के सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं।
कानून_वो क्या होता है?रेयांश ने पूछा।
चलो आज तुम्हारे सवालों का जवाब सभी गांव वालों को बुला कर देता हूं,ताकि वे भी पशु ,पक्षियों पर बर्बरता पर हमारे देश में क्या कानून है? हमारा संविधान जानवरों की क्रूरता पर  क्या कहता है ?
शाम को सभी गांव वाले रेयांश के चौपाल  पर जुटे।
रेयांश के नाना ने कहना शुरू किया_
प्रकृति को संतुलित करने के लिए जानवरों और पक्षियों का खास योगदान रहता है।
_ भारतीय दंड संहिता 428 और 429 के मुताबिक किसी पशु की जबरदस्ती मारना ,अपंग करना ,बेवजह दंड देने पर इसे अपराध माना जाएगा।
_ प्रिवेंशन ऑफ  क्रुएलिटी आन एनिमल एक्ट 1960 के अनुसार किसी पशु को जानबूझ कर आवारा छोड़ने पर 3 महीने की सजा हो सकती है।
गांव के एक युवक ने पूछा _चाचा जो मदारी बंदर नचाते हैं,उनके लिए भी सजा है कि नहीं?
हां,ये कानूनन अपराध माना जाता है।
_भारतीय  वन संरक्षण अधिनियम 1971 के अनुसार किसी भी पशुओं का शिकार करना,करतब देखना, निर्मम हत्या करने जैसा जघन्य अपराध के अंतर्गत आता है।
ऐसी स्थिति में व्यक्ति को 3 साल के कठोर कारावास और 10000 का आर्थिक देने का प्रावधान है।यदि अपराध को दोहराया जाए तो 7 साल की सजा और 25000 आर्थिक दंड देने का प्रावधान है।
अच्छा ,सभी ग्रामीण मुंह खोले बैठे थे , उनमें से किसी को भी पता नहीं था कि ये सब भी कानून भारतीय दंड संहिता में है। रेयांश को कुछ समझ में आया कुछ नहीं ,लेकिन ग्रामीणों की समझ में आ गया।
रेयांश को  1 महीने में अपने नाना ,नानी से बहुत कुछ सीखने को मिला।प्रिशा भी शादी के बाद बहुत दिनों बाद अपने मां ,पिता और बहन के साथ रही।शादी में राहुल भी आ गए थे ,सबने मिलकर शादी में खूब धमाल मचाया ,विदाई के बाद वह भी वापस राहुल और रेयांश के साथ वापस लौट गई , भारी मन से।
नाना नानी फिर अकेले रह गए,लेकिन नाना ने गांव में ही एक स्वयं सेवी संस्था खोली जो जानवरों के खिलाफ क्रूरता से न्याय दिलाने में मदद करे।