....तंत्र मंत्र द्वारा आसुरी,तामसिक शक्तियों को जगाने की रात। चंद्रमा मन पर हावी होता है,इस दिन कमजोर लोगों में आत्महत्या और नकरात्मकता का भाव हावी होता है।
शमशान में चिताएं धू धू कर जल रहीं थी,कुत्तों,और सियार के रोने की आवाज प्रतिध्वनि करती वापस आ रही थी।
फुलवा एक कोने में बंधी , बकरी की तरह डरी सहमी सी, अघोरी को एकटक निहार रही थी।
अघोरी अपनी साधना में लीन था।
रमेश के पिता का देहांत हो गया था,सभी सगे संबंधी उन्हें शमशान में लेकर आए थे।दाह संस्कार के बाद सभी अपने अपने घर वापस हो गए।
रमेश से जब उसके मित्र ने वापस लौटने को कहा तो रमेश ने कहा _तू जा,कहते हैं ना जीवन की क्षण भंगुरता का सच्चा अनुभव लेना हो तो कुछ समय शमशान में जरूर बिताना चाहिए।
उसके मित्र ने कुछ नहीं कहा ,वो जानता था ,अभी रमेश व्यथित है,कुछ कहने सुनने का कोई फायदा नहीं।वह वापस लौट गया।
रमेश एक जगह बैठ गया। वह अपने पिता के साथ बिताए पलों को याद करता,कैसे पिता ने मां के जाने के बाद ,माता पिता दोनों का ही प्यार दिया।
समय कहां रुकता है,रमेश अपनी यादों में खोया था,नीरवता घनी हो रही थी।
अचानक। बचाओ बचाओ की ध्वनि सन्नाटे में गूंज गई,जिससे उसका ध्यान भटका।
इतनी रात में एक महिला की आवाज ,क्या ये मेरा भ्रम तो नहीं_रमेश ने मन ही मन सोचा।
आवाज फिर अंधेरे को चीरती ,उसके कानों में पड़ी।
नहीं नहीं ये मेरा भ्रम नहीं है,वह आवाज की दिशा में दौड़ा।रास्ते में पड़े ,नरमुंडों से टकराता ,वह वहां पहुंचा जहां से आवाज और रोशनी आ रही थी।
सामने उसने जो दृश्य देखा ,उसका मुंह खुला का खुला रह गया।
एक अघोरी जिसकी आंखें सुर्ख लाल थी, पूजा की थाल लिए ,फूल ,माला एक युवती पर चढ़ा रहा था।सामने कई नर मुण्ड ,दारू की बोतल पड़े थे।
वही युवती मेमने की तरह घिघिया रही थी,मुझे छोड़ दो,मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?
अघोरी ने जोर का अट्टहास किया _ तू मेरी आखिरी बलि है,तुझे देवी को चढ़ा मैं अमर हो जाऊंगा हा हा हा हा हा।
अघोरी ने उसे ढेर सारा सिंदूर लगाया ,और जैसे ही फरसा उठाया ,वैसे ही पीछे से एक बड़ा पत्थर किसी ने दे मारा। वो और कोई नही रमेश था,जिसने देखा अब वो लड़की अघोरी के हाथों से बचेगी नहीं तो ,वह वहीं पड़ा एक बड़ा पत्थर ले आया।
अघोरी लड़खड़ा कर गिरा ,उसके सर से रक्त की धारा बह निकली।
वह चिल्लाया,अघोरी कभी मरते नहीं ,मैं अपनी साधना अवश्य पूरी करने इस धरती पर रहूंगा। और अघोरी का शरीर अचानक धुएं में बदल गायब हो गया।
रमेश लड़की की ओर दौड़ा ।लड़की की भी आंखें बोझल हो चुकी थीं।
रमेश ने पूछा कौन हो तुम ?
फुलवा नाम है मेरा,गांव में रहती थी। मैं ज्यादातर बीमार रहती ,मुझे मिर्गी के दौरे आते थे। कुछ दिनों बाद गांव में ये अघोरी आया था।
गांव के लोगों को जो भी बताता ,सब सच होता। लोगों को उसने अपने वश में कर लिया ,सभी उसकी कही बातें अक्षरशः मानते थे।
मेरे बाबा और मां भी इसके पास गए,मेरे इलाज के लिए।
अघोरी ने कहा इसपर प्रेत का साया है।
अघोरी ने मुझे भभूत लगाई , फिर मैं ज्यादा तर नशे में रहती या सोती रहती।
अब मुझे मिर्गी के झटके नहीं आते थे।
एक दिन अघोरी ने मेरे मां ,बाबा से कहा कि
कल अमावस्या की रात है,मैं कल कुछ अनुष्ठान इसके उपर से प्रेत उतारने के लिए करूंगा,इसलिए इसे अकेले मेरे साथ शमशान चलना होगा।
मां ,बाबा ने अनुमति दे दी।फिर ये अघोरी मुझे शमशान ले आया ,यहां उसने बताया कि वो मेरी बलि देगा क्योंकि वो अमर होना चाहता है,मैं उसकी आखिरी बलि थी, 107 बलि पूरी हो चुकी थी।
समय पर आपने मुझे बचा लिया। लेकिन वह वापस जरूर आएगा ।
रमेश ने उसे उठाया ,और उसके घर छोड़ कर आया।
स्वरचित_संगीता

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