गृहस्थ आश्रम तो खुद एक साधना है 
जिसमे आकर भगवान भी रम गये है
नही जाना पडता हमे हिमालय पर 
सारे शुभ कर्मो को करके पुण्य पाते है ।

हमारी तपस्या भी बहुत अनौखी है 
सारी गृहस्थी के लिये प्रार्थना होती 
नही चाँहते हम अकेले खुद के लिये 
मेरी साधना मे अपनो की प्रार्थना है।

अपने माँ बाप की सेवा ही साधना है
जैसी कर ली चारो धाम की यात्रा हो 
मेरे जन्मदाता ही हमारी उपासना है
उनके चरणो मे ही सच्ची साधना है ।

भगवान की साधना करने को दुनियाँ है
दीन दुखी की सेवा भी साधना ही है ।
कर लो मिल कर सब सच्ची साधना को 
जो है बेसहारा ,दीन दुखी ,सहारा दो उनको ।
मीनाक्षी शर्मा