🌹🌻🎄🌹🌻🎄🌹🌻🎄🌹🌻🎄🌹🌻
मनुष्य का मस्तिष्क विचारों, कल्पनाओं और मूल्यों का पुंज है। कोई विचार मस्तिष्क में ही जन्म लेते हैं और उसके अनुसार कर्म के लिए प्रेरित करते हैं। कर्म भी दो प्रकार के होते हैं। इहलौकिक और पारलौकिक। किसी भी कर्म के पहले मनुष्य के हृदय में विचार उत्पन्न होता है, क्योंकि मन कल्पनाओं का पुंज है। मन की किसी भी कल्पना को पूर्ण करने के लिए कर्म में निरत होना पड़ता है तथा उस कर्म को अन्तिम ध्येय तक पहुंचाने के लिए मन में विचार उत्पन्न होकर उस प्रकार के कर्म को साधना करनी पड़ती है।

जीवन भी एक बड़ी साधना है। प्रेम साधन, भक्ति साधन, मोक्ष साधन, योग साधन इत्यादि अनेक हैं। कोई भी कर्म करने के पहले उसका कारण भी अवश्य हुआ करता है। इहलौकिक कर्म के लिए कारण स्पष्ट है कि मनुष्य नवीनता का उपासक है। आज जिस एक वस्तु की इच्छा मन में उठ कर उसकी प्राप्ति के लिए साधना की जाती है, कल उससे अनिच्छा भी हो सकती है और भौतिक वस्तु की प्राप्ति के लिए प्राय: यही फल हुआ करते हैं। मनुष्य वासनाओं का दास है।

इसी से भौतिक अथवा इहलोक साधना की ओर उसका झुकाव अधिक रहता है किन्तु व्यावहारिक, सांसारिक विभूतियों में कह कर भूति मात्र कहा है जिससे भौतिक शब्द की रचना हुई है। सांसारिक वैभव बहुत कुछ है किन्तु सब कुछ नहीं। इस वैभव से मित्र, दास, दासी, राजपाट बहुत कुछ प्राप्त हो सकता है, किन्तु प्रेम, स्वास्थ्य, शांति और सुख नहीं मिल सकता।

हृदय की शांति के लिए दूसरी विधि की खोज करना होगा। कितने ही ऐसे व्यक्ति मिलेंगे जो सांसारिक सत्पत्ति रहते हुए भी उस शांति सुख और प्रगाढ़ निद्रा के लिए लालायित रहते पाये जाते हैं जिसे सड़क के किनारे सोने वाले अनुभव करते हैं। सांसारिक सम्पत्ति गनन चुम्बी अट्टलिका बना सकती है किन्तु प्रत्येक मनुष्य का चाहे वह धनिक हो अथवा दिरद्री अटूट समाधि के लिए छह फुट जमीन से अधिक आवश्यकता न होगी।

रात दिन के आघात,दुख सफलता और निराशाओं के कारण जब मनाव ह्रदय से पड़ता है उसे अपनी शक्तियों के ऊपर अबिस्वास होजाता है एवं संसार मे उसे अपना कोई भी दिखलाई नही पड़ता है उस समय वह असरण मंगलमय भगवान की ओर आकर्षित होता है और संसार मे रहते हुए भी संसार का की चहल पहल से दूर अपने जीवन पक्ष का निमार्ण किसी अन्य दिशा में करने का आंकाक्षा करते हुए साधना पथ बदल देता है उस समय इह लौकिक धेय्य न होकर पारलौकिक धेय्य होजाता है बस यही पारलौकिक कर्म का कारण है
,,,,,,,,,,स्वरचित,,,,,,,🌻🌹🌻🌹🎄🌻🌹प्रितम वर्मा🌹🌻🎄🌹🌻🎄🌹