एक घर सपनों का हमारा होता 
जहां सिर्फ खुशियों का पिटारा होता 
कुटिल क्लेश कलंक ना होता
 प्रेम सुधा रस सदा ही बहता 
झूठ दंभ छल छंद ना होता 
सच्चा सुदृढ़ भरोसा होता
 सुख-दुख सबके सांझे होते 
झगड़े झांसे कभी ना होते 
रिश्तो में मर्यादा होती
 संस्कारों की पूजा होती 
 कड़वाहट का नाम ना होता
 कभी कोई अपमान ना होता
 सुख सपनों का सागर होता 
काश एक घर ऐसा होता।
      प्रीति मनीष दुबे
      मण्डला(म.प्र)