अंतरिक्ष में बैठा वह जासूस
पलपल की खबरों से अवगत कराता
किधर से बादल उठ रहे हैं
किधर से है तूफानों का अंदेशा

वह जासूस न तो सजीव है
न ही निर्जीव
हमारे विज्ञान का महज एक कार्यरूप है।

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स्वरचित
सीमा..✍️
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