आंखों की चंचलता के पीछे
गम के आँसू जो देख लेता है,
होठों की मुस्कुराहट में दबी
कुंठा जो भाँप लेता है।
चेहरे की रौनक भी छुपा सकती नहीं वेदना,
ऐसा जासूस है मन जो हर तिरोहित को
उजागर कर देता है।
मधुलिका सिन्हा
कोलकाता