साधना ऐसी हो जिससे जीवन संवरता हो।
सिद्धि भी मिलती हो सब कुछ संवरता हो।
करो जो साधना तो कुछ तो बदलाव आए।
मनः स्थिति हो परिवर्तित व समभाव आए।
बिना साधना के नहीं कुछ भी ये मिलता है।
कड़ी है साधना संकल्प सबकुछ मिलता है।
कुछ भी जो पाना चाहते तो साधना करिए।
कड़ी मेहनत संग ही प्रभु आराधना करिए।
कभी साधक की साधना न होती है विफल।
करेंगें मन व दिल से ये साधना होगी सुफल।
प्रभु देखता है किसी साधक की तपस्या को।
कठिन है साधना करना कड़ी है तपस्या वो।
ऋषि मुनियों ने की कड़ी साधना तपोबल से।
चाहा जो पाया शक्तियों के अपरमित बल से।
रावण भी तपस्वी था कड़ी की साधना उसने।
हुए खुश जगदीश्वर तो लिया वरदान है उसने।
किया साधना से प्राप्त शक्तियों का दुरुपयोग।
जगत ने ये भी देखा है कर सका न फिर भोग।
प्रभु श्रीराम ने कैसे किया है संहार रावण का।
महापंडित जो ज्ञानी था घमंड टूटा रावण का।
करें जो साधना तो जगत कल्याण की सोचो।
निरीहों की मदद सोचो धर्म की राह में सोचो।
साधना से तो सच पूछो ये जीवन संवरता है।
सही ये मार्ग मिलता है धर्म भी तो संवरता है।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़,यू. पी.

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